Bangladesh Elections 2026: बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव हो रहे हैं। इन्हें दशकों का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव माना जा रहा है। ये चुनाव पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग के बिना होंगे। छात्र-नेतृत्व में विद्रोह के बाद लीग के 15 साल के शासन का अंत हुआ। इसके बाद उसे चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में अगस्त 2024 से, देश में कार्यवाहक सरकार है।
बाद में, एक विशेष अदालत ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई के लिए शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई। फिलहाल हसीना निर्वासित होकर भारत में हैं। उधर उनकी पार्टी पर राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने पर रोक लगी है।
बांग्लादेश की इकलौती सदन वाली विधायिका, जातीय संसद के 350 सदस्यों को चुनने के लिए लगभग 12 करोड़ 70 लाख पंजीकृत मतदाता वोट डाल सकते हैं। मुख्य मुकाबला कई दलों के गठबंधन की अगुवाई करने वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और छात्र समर्थित नेशनल सिटिजन पार्टी समेत गठबंधन का नेतृत्व करने वाली जमात-ए-इस्लामी के बीच है। नेशनल सिटिजन पार्टी का उदय 2024 के उस आंदोलन के बाद हुआ, जिसके कारण पिछली सरकार गिर गई थी।
खास बात है कि इस चुनाव में मतदान के साथ-साथ पूरे देश में जनमत संग्रह भी होगा। मतदाता 'जुलाई राष्ट्रीय चार्टर' पर भी फैसला करेंगे, जो बांग्लादेश की राजनीतिक व्यवस्था को नया रूप देने के लिए तैयार किया गया है। अंतरिम नेता मुहम्मद यूनुस ने कहा है कि संयुक्त मतदान अगले सौ सालों के लिए देश की दिशा तय करेगा। लोकतंत्र की बहाली चुनाव प्रचार का प्रमुख मुद्दा है।
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने चुनावों की आलोचना की है। इसे भेदभाव से भरा और अवैध बताया है। बांग्लादेश और भारत के रिश्तों पर संभावित असर को लेकर भी चुनाव पर कड़ी नजर रखी जा रही है। बांग्लादेश ने भारत से औपचारिक रूप से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है। इसके चलते दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी है। भारत ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उनके साथ हो रहे व्यवहार पर चिंता जताई है।
बहरहाल, बांग्लादेश के आम चुनाव सुर्खियों में हैं। चुनाव नतीजे बांग्लादेश की लोकतांत्रिक रूपरेखा तय करने में अहम होंगे। इनका असर दक्षिण एशिया के सियासी समीकरणों पर भी पड़ेगा।