उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने न्यायपालिका में राजभाषा हिंदी के अधिक से अधिक प्रयोग की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में ऐसी भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए, जिसे आम लोग आसानी से समझ सकें और जिससे उनका न्यायपालिका के प्रति विश्वास और सहजता बढ़े। अवध बार एसोसिएशन, उच्च न्यायालय, लखनऊ और उत्तर प्रदेश हिंदी विधि प्रतिष्ठान, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री ने ये बातें कहीं। कार्यक्रम में ‘न्यायपालिका में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने में वास्तविक अवरोध’ विषय पर विचार-विमर्श किया गया।
हिंदी करोड़ों लोगों की अभिव्यक्ति का माध्यम
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और न्यायपालिका में इसके अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि देश के करोड़ों लोगों की भावनाओं और अभिव्यक्ति का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि हिंदी की खासियत है कि वह सभी को स्वीकार करती है। हिंदी सबकी भाषा है और न्याय व्यवस्था में इसके प्रयोग से आम नागरिकों के लिए कानूनी प्रक्रिया को समझना आसान हो सकता है।
लोकतांत्रिक विकास में अधिवक्ताओं की अहम भूमिका
ब्रजेश पाठक ने कहा कि आजादी के बाद देश में जब पहली बार चुनाव हुआ था, तब चुनाव लड़ने वालों में बड़ी संख्या अधिवक्ताओं की थी। उन्होंने कहा कि देश के लोकतांत्रिक और संवैधानिक विकास में अधिवक्ता समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में आमजन की सहज भागीदारी और समझ को बढ़ाने के लिए सरल एवं सुगम भाषा का प्रयोग भी जरूरी है।
न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज में भारतीय भाषाओं को मिले स्थान
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक चली औपनिवेशिक व्यवस्था के प्रभाव के कारण अंग्रेजी को एक विशेष वर्ग की भाषा के रूप में स्थापित किया गया। अब भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी को न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों में अधिक व्यापक स्थान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इससे आम नागरिक न्याय व्यवस्था से खुद को अधिक सहजता से जोड़ सकेगा और न्यायिक प्रक्रिया को समझने में भी आसानी होगी। कार्यक्रम में न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी, कार्यक्रम संयोजक एवं अवध बार एसोसिएशन एल्डर कमेटी के सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद आरिफ खान, हिंदी विधि प्रतिष्ठान के अध्यक्ष देश रतन मिश्रा, संचालक एस.एस. चौबे सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।