Breaking News

सोनिया गांधी की तबीयत में सुधार, सर गंगाराम हॉस्पिटल में चल रहा इलाज     |   इराक में बड़ा हमला: एयरस्ट्राइक में 2 सैनिकों की मौत, 20 घायल     |   दिल्ली विधानसभा को मिली बम से उड़ाने की धमकी     |   रूस का दावा: एक रात में तबाह किए 389 यूक्रेनी ड्रोन     |   कांग्रेस को पूर्व मुख्यालय 24 अकबर रोड खाली करने का फाइनल नोटिस     |  

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर विधानसभा अध्यक्ष का घेराव, सीबीआई जांच पर उठे सवाल

Uttarakhand: देहरादून के यमुना कॉलोनी में आज अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर आंदोलन तेज होता नजर आया। सीबीआई जांच की सुस्त रफ्तार और प्रभावशाली संदिग्धों की गिरफ्तारी न होने से नाराज आंदोलनकारियों ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी का घेराव किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जांच में पारदर्शिता की मांग उठाई।

अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले जुटे आंदोलनकारियों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। मंच की अध्यक्ष कमला पंत ने कहा कि अब तक सरकार ने जनता को यह नहीं बताया कि जांच में क्या सामने आया है। उन्होंने सीधे तौर पर कुछ संदिग्धों के नाम लेते हुए आरोप लगाया कि न तो उनकी गिरफ्तारी हुई है और न ही उन्हें जांच के दायरे में लाया गया है।

कमला पंत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कार्रवाई के बजाय संदिग्धों को संरक्षण दिया जा रहा है, जो देवभूमि की जनता का अपमान है। उन्होंने चेतावनी दी कि उत्तराखंड की महिलाएं अब अपनी अस्मिता पर हमला बर्दाश्त नहीं करेंगी और अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र होगा।

उन्होंने मुजफ्फरनगर कांड का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तराखंड की नारी शक्ति पहले भी बड़े संघर्ष लड़ चुकी है और इस बार भी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने साफ कहा कि जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिलता और कथित वीआईपी चेहरों का खुलासा नहीं होता, तब तक आंदोलन और जनप्रतिनिधियों का घेराव जारी रहेगा।

वहीं, कांग्रेस भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरती नजर आई। कांग्रेस प्रवक्ता प्रतिमा सिंह आंदोलन में शामिल हुईं और कहा कि पार्टी शुरू से ही अंकिता को न्याय दिलाने की मांग कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सीबीआई जांच में वीआईपी लोगों की भूमिका की भी गंभीरता से जांच हो रही है या नहीं।

साथ ही उन्होंने भाजपा सरकार और मंत्री सुबोध उनियाल के बयान पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की भाषा आंदोलनकारियों और प्रदेश की जनता का अपमान है।