उत्तर प्रदेश में भूजल स्रोतों की गुणवत्ता और स्थिति की निगरानी के लिए किए जा रहे परीक्षण कार्य में प्रदेश ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। योगी सरकार के तहत जल स्रोतों की जांच और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच यूपी जल निगम ग्रामीण ने निर्धारित लक्ष्य का 94.39 प्रतिशत पूरा कर लिया है।
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जलशक्ति मंत्रालय, भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में उत्तर प्रदेश के लिए 48,055 भूजल स्रोतों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसके मुकाबले 15 सितंबर 2026 तक 45,361 स्रोतों का परीक्षण पूरा हो चुका है।
उत्तर प्रदेश ने निर्धारित लक्ष्य का 94.39 प्रतिशत हासिल किया है। इस उपलब्धि के साथ राज्य देश के राज्यों की सूची में पहले स्थान पर है। जांच में भूजल स्रोतों के अलावा भूमिगत और ओवरहेड टंकियों समेत पानी के अन्य स्रोतों को भी शामिल किया गया है। यूपी जल निगम ग्रामीण के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने बताया कि भूजल स्रोतों का नियमित परीक्षण पेयजल की गुणवत्ता और जल स्रोतों की स्थिति की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के स्तर पर जल स्रोतों की गुणवत्ता, सोर्स सस्टेनेबिलिटी और गहन निगरानी पर जोर दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश ने इस दिशा में बेहतर परिणाम हासिल किए हैं और प्रदेश में सभी लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास जारी रहेगा। भूजल स्रोतों के परीक्षण की राज्यवार रैंकिंग में उत्तर प्रदेश के बाद पंजाब दूसरे और आंध्र प्रदेश तीसरे स्थान पर हैं।
उत्तर प्रदेश - 94.39%
पंजाब - 83.46%
आंध्र प्रदेश - 83.46%
उत्तराखंड - 82.30%
केरल - 81.13%
उत्तर प्रदेश की उपलब्धि पंजाब और आंध्र प्रदेश की तुलना में अधिक रही है। यूपी जल निगम ग्रामीण के अधीक्षण अभियंता एवं राज्य प्रयोगशाला प्रमुख ज्ञानेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि उत्तर प्रदेश ने भूजल स्रोतों के परीक्षण में 94.39 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है, जबकि राष्ट्रीय औसत 50.46 प्रतिशत है। इस तरह प्रदेश की उपलब्धि राष्ट्रीय औसत से करीब 44 प्रतिशत अधिक रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित 48,055 स्रोतों के लक्ष्य में से 45,361 स्रोतों का परीक्षण पूरा किया जा चुका है। अब लक्ष्य को पूरा करने के लिए 2,694 स्रोतों की जांच शेष है। प्रदेश ने पहली छमाही में ही निर्धारित लक्ष्य का बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया है। भूजल स्रोतों की नियमित जांच के जरिए पानी की गुणवत्ता और स्रोतों की स्थिति पर निगरानी बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।