उत्तराखंड की ठंडी वादियों में सियासी पारा अब चरम पर है। चुनावी रणभेरी अभी बजी नहीं है, लेकिन 2027 की तैयारी में बीजेपी और कांग्रेस ने अपनी तलवारें भांजनी शुरू कर दी हैं। एक तरफ सत्ताधारी बीजेपी है, जो जेपी नड्डा की मौजूदगी में विधायकों का 'डेथ वारंट' यानी उनकी सर्वे रिपोर्ट लेकर बैठने वाली है, तो दूसरी तरफ दिल्ली से संजीवनी पाकर लौटी कांग्रेस ने 90 दिन का ऐसा 'एक्शन प्लान' बनाया है जिससे सरकार की चूलें हिलाने का दावा है।
उत्तराखंड की सियासत में अब केवल बातों से काम नहीं चलेगा, क्योंकि अब 'रिपोर्ट कार्ड' का वक्त आ चुका है। आगामी 14 फरवरी को पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में बीजेपी कोर कमेटी की एक महाबैठक होने जा रही है। खबर है कि इस बैठक की मेज पर विधायकों की 'सर्वे रिपोर्ट' होगी। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने साफ कर दिया है कि 2027 में टिकट का एकमात्र आधार 'जीत की संभावना' होगा। पार्टी ने चार अलग-अलग सर्वे कराए हैं, जिनमें से पहले सर्वे की रिपोर्ट विधायकों की धड़कनें बढ़ाने वाली है।
जहां बीजेपी सर्वे और संगठन के दम पर घेराबंदी कर रही है, वहीं कांग्रेस अब 'फुल थ्रॉटल' मोड में है। दिल्ली दरबार में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात के बाद प्रदेश कांग्रेस एक 90 दिन का मास्टर प्लान लेकर मैदान में उतरी है। इस प्लान के तहत भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा जाएगा। रणनीति की कमान खुद गणेश गोदियाल संभाले हुए हैं, जो गांव-गांव जाकर जनता से सीधा संवाद कर रहे हैं। इस आंदोलन की पहली बड़ी झलक 16 फरवरी को दिखेगी, जब प्रीतम सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस राजभवन का घेराव करेगी।
दिलचस्प बात यह है कि जहां कांग्रेस आंदोलन की तैयारी कर रही है, वहीं बीजेपी ने उसके कुनबे में ही सेंध लगा दी है। महिला कांग्रेस की प्रदेश महामंत्री रेणु नेगी समेत पौड़ी, चमोली और उत्तरकाशी के सैकड़ों प्रधानों और ब्लॉक प्रमुखों ने बीजेपी का हाथ थाम लिया है। यानी एक तरफ कांग्रेस 90 दिन का प्लान बना रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी उसके आधार को ही ढहाने में जुटी है।
सर्वे रिपोर्ट का खौफ, दिल्ली वाला एक्शन प्लान और दलबदल का यह दौर... बता रहा है कि उत्तराखंड की जंग इस बार बहुत दिलचस्प होने वाली है। बीजेपी अपने विधायकों को अल्टीमेटम दे रही है, तो कांग्रेस गांव-गांव जाकर खोई हुई जमीन तलाश रही है। अब 14 फरवरी की बैठक और 16 फरवरी का घेराव यह तय करेगा कि मिशन 2027 का पलड़ा किस ओर झुकेगा।