Manipur: मणिपुर में सरकार गठन में कुकी समुदाय के तीन विधायकों की भागीदारी के खिलाफ राज्य के तीन पहाड़ी जिलों में हजारों लोगों ने रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने संबंधित विधायकों पर समुदाय के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया।
चूड़ाचांदपुर जिले में प्रदर्शनकारियों ने कुकी विधायक नेमचा किपगेन, जो समुदाय से आने वाले एलएम खौते और हमार जनजाति से ताल्लुक रखने वाले एन सनाते के पुतले जलाए। ये तीनों ही विधायक सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से जुड़े हुए हैं। किपगेन ने राज्य की नवगठित सरकार में उप-मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। कांगपोकपी और तेंगनुपाल जिलों में भी विरोध रैलियां निकाली गईं।
चूड़ाचांदपुर में कुकी महिला मानवाधिकार संगठन (केडब्ल्यूओएचआर) और स्वदेशी जनजातीय नेता मंच (आईटीएलएफ) की महिला शाखा ने सरकार गठन में किपगेन की भागीदारी के विरोध में संयुक्त रूप से रैली निकाली।
प्रदर्शनकारियों ने कोइटे मैदान से स्मृति दीवार तक लगभग तीन किलोमीटर मार्च किया। उन्होंने किपगेन के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए और समुदाय के लिए अलग प्रशासन की अपनी अपील दोहराई।
कुकी जो परिषद (केजेडसी) ने गुरुवार को कहा था कि इन विधायकों ने 13 जनवरी को पारित लुंगथू प्रस्ताव का उल्लंघन किया है, जिसमें तय किया गया था कि समुदाय के सदस्य सरकार गठन में तभी हिस्सा लेंगे, जब केंद्र और राज्य के प्राधिकारों से लिखित आश्वासन मिलेगा कि उनके लिए विधायिका से लैस केंद्र-शासित प्रदेश के रूप में एक अलग प्रशासन होगा।
रैली के आयोजन के लिए कुकी बहुल जिले में आहूत 24 घंटे के “पूर्ण बंद” में ढील दी गई। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “तीनों विधायक जनता की उम्मीदों के साथ विश्वासघात करते हुए मणिपुर सरकार में शामिल हो गए। नेमचा किपगेन को उपमुख्यमंत्री बना दिया गया।”
कांगपोकपी जिले के साइकुल और तेंगनुपाल जिले के मोरेह में भी सरकार गठन में बीजेपी के तीन कुकी विधायकों की भागीदारी की निंदा करते हुए इसी तरह की रैलियां निकाली गईं। विरोध-प्रदर्शनों के मद्देनजर चूड़ाचांदपुर, कांगपोकपी और फेरजावल जिलों में तीनों विधायकों के आवासों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई। इस बीच, नवगठित सरकार में मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले गोविंदास कोंथौजम ने कहा कि चूड़ाचांदपुर में थोड़ी अशांति है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है।
उन्होंने कहा, “प्रदर्शनकारी अपना गुस्सा और असंतोष जाहिर कर रहे हैं। कुछ नहीं होगा। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, लेकिन तुरंत कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। उनमें से कई शांतिप्रिय लोग हैं, जो राज्य में सामान्य स्थिति बहाल होते देखना चाहते हैं। हालात धीरे-धीरे सुधरेंगे।”
मणिपुर में मई 2023 में मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़क उठी थी, जिसके बाद राज्य में पिछले साल फरवरी में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। कुकी-जो समुदाय के नेताओं की समुदाय के लिए एक अलग प्रशासनिक इकाई की मांग के बीच बीजेपी विधायक युमनाम खेमचंद सिंह ने बुधवार को मणिपुर के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।
उन्होंने ये पदभार बीजेपी नेता एन बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लगभग एक साल बाद संभाला। कुकी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली किपगेन और नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के विधायक एल दिखो ने मणिपुर के उप-मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है।
हमार जनजाति के विधायक एन सनाते बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उस दल का हिस्सा थे, जिन्होंने इंफाल में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर राज्य में सरकार गठन का दावा पेश किया।
इस दल में कुकी-जो जनजाति के एक और विधायक एलएम खौते भी शामिल थे। हमार लोग कुकी-जो समुदाय का हिस्सा हैं। मणिपुर विधानसभा में कुकी-जो समुदाय के कुल 10 विधायक हैं, जिनमें से सात भाजपा से जुड़े हुए हैं।