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हेमंत सोरेन सरकार की पहल, गौशालाओं से खुला आय का नया रास्ता

Jharkhand: झारखंड की बड़ी आबादी खेती और पशुपालन पर निर्भर है। किसानों, विशेष रूप से गाय पालन करने वालों की आय बढ़ाने के लिए प्रदेश की हेमंत सोरेन सरकार लगातार प्रयास कर रही है। सरकार गौशालाओं के रखरखाव को मजबूत करने के साथ-साथ गोबर से बनने वाले वर्मी कम्पोस्ट को ग्रामीणों की अतिरिक्त कमाई का माध्यम बना रही है। गिरिडीह के पचंबा स्थित श्री गोपाल गौशाला इसका एक सशक्त उदाहरण है। इस गौशाला में तैयार किया जाने वाला वर्मी कम्पोस्ट आज आमदनी का एक बड़ा स्रोत बन चुका है।

झारखंड सरकार की बिरसा हरित ग्राम योजना इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत वृक्षारोपण और बागवानी को बढ़ावा दिया जाता है, और लगाए गए पौधों की पोषण आवश्यकता पूरी करने के लिए वर्मी कम्पोस्ट गौशालाओं से खरीदा जाता है। इससे गौशालाओं को एक स्थायी आय का भरोसेमंद स्रोत मिलता है।

झारखंड सरकार गौशालाओं और पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। सरकार ने गौशालाओं में पशुओं के चारे के लिए प्रति पशु 100 रुपये प्रतिदिन देने जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। पहले ये सहायता प्रति पशु 50 रुपये प्रतिदिन की दर से दी जाती थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का मानना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन एक ‘एटीएम’ की तरह है, जो परिवारों को स्थायी आय देने में सक्षम है।

वर्मी कम्पोस्ट की बढ़ती मांग और सरकार की स्पष्ट मंशा श्री गोपाल गौशाला जैसा एक सफल मॉडल प्रस्तुत करती है, जो यह साबित करती है कि गायों की सेवा सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम भी बन सकती है।