Bangladesh Elections: तारिक रहमान... ये वो नाम है जो बांग्लादेश में होने जा रहे बड़े राजनीतिक बदलाव के केंद्र में है। उम्मीद है कि देश में हुए अहम संसदीय चुनाव में बीएनपी यानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की जबरदस्त जीत के बाद रहमान सत्ता की बागडोर संभालेंगे।
60 साल के तारिक रहमान बांग्लादेश की राजनीति में नया चेहरा नहीं हैं। उनका जन्म 20 नवंबर, 1965 को बांग्लादेश के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवारों में से एक में हुआ था। उनके पिता जियाउर रहमान देश के राष्ट्रपति और बीएनपी के संस्थापक थे। वहीं उनकी मां खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।
इसके बावजूद तारिक रहमान की राह आसान नहीं रही। बीएनपी में अपनी जगह बनाने के बाद उन्होंने लगभग 17 साल लंदन में निर्वासन में बिताए। ये वक्त कानूनी लड़ाइयों, राजनीतिक उथल-पुथल और शेख हसीना की अवामी लीग के साथ गहरी प्रतिद्वंदिता से भरा रहा।
तारिक रहमान 2026 के ऐतिहासिक चुनाव से ठीक पहले दिसंबर 2025 में ढाका लौटे। शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने वाले छात्रों की अगुवाई में हुए बड़े विद्रोह के बाद ये पहला चुनाव था। रहमान की वतन वापसी पर लोगों ने उन्हें सिर-आंखों पर बिठा लिया। ये उनके परिवार की राजनीतिक विरासत के लिए लंबे समय से चले आ रहे समर्थन और एक नए अध्याय के शुरु होने की उम्मीदों को बयां करता था।
बीएनपी की निर्णायक जीत के बाद अब तारिक रहमान का बांग्लादेश का नया प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। इससे न सिर्फ देश में सालों से चला आ रहा राजनीतिक ठहराव खत्म होगा बल्कि बेहतर शासन और बदलाव को लेकर बड़ी उम्मीदें भी जगी हैं।
चुनाव प्रचार के दौरान तारिक रहमान ने खुद को एक ऐसे राजनेता के तौर पर पेश किया जिसका फोकस स्थिरता के साथ-साथ देश में बेहतर आर्थिक बदलाव और संस्थागत सुधार लाने पर है। साथ ही उन्होंने साफ-सुथरी राजनीति और ज्यादा जवाबदेह सरकार का वादा भी किया। इसका मकसद काफी हद तक लोगों तक ये संदेश पहुंचाना था कि वे देश को उस गहरे ध्रुवीकरण से दूर ले जाना चाहते हैं जो हाल के दिनों में देखा गया।
हालांकि सत्ता में काबिज होने के बाद भी तारिक रहमान के लिए चुनौतियां कम नहीं होंगी। आलोचक घरेलू राजनीति से उनकी लंबी गैरमौजूदगी की ओर इशारा कर रहे हैं। वे चिंता जता रहे हैं कि पुराने पावर नेटवर्क वापस आ सकते हैं, जो संभवतः महत्वपूर्ण बदलाव को रोक सकते हैं। साथ ही इस चुनाव में कड़ी चुनौती देने वाले इस्लामिक गठबंधन सहित नए राजनीतिक दलों के आने से, रहमान को जनता की बहुत ज्यादा उम्मीदों और अब भी बने हुए अविश्वास के बीच सरकार चलानी होगी।
फिलहाल, वापसी की तैयारी हो गई है। तारिक रहमान सिर्फ एक उम्मीदवार के तौर पर ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश के अगले संभावित लीडर के तौर पर भी लौटे हैं। उनके कंधों पर अगर एक बड़ी राजनीतिक विरासत का बोझ है तो एक ऐसे देश की उम्मीदें भी हैं जो अपनी दिशा तलाश रहा है।