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अमेरिका-इजरायल का ईरान पर बड़ा हमला, पश्चिम एशिया में जंग के हालात

दुनिया को जिस बात की आशंका थी, अंतत: वही हुआ। कई दौर की परमाणु वार्ता विफल रहने, हफ्तों से जारी तनातनी और लामबंदी के बीच अमेरिका व इजरायल ने शनिवार को ईरान पर जोरदार हमला कर दिया। हमलों की शुरुआत शनिवार सुबह इजरायल ने की, जिसके बाद अमेरिका ने भी पश्चिम एशिया में मौजूद अपने सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों से ईरान पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले शुरू कर दिए।

हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के आवास और राष्ट्रपति भवन समेत सैन्य ठिकानों, मिसाइल प्रतिष्ठानों और रणनीतिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। ईरान के रक्षा मंत्री अमीर नासिरजादेह और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर मोहम्मद पाकपुर मारे गए हैं। दावा किया गया कि हमलों के पहले ही खामेनेई को सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचा दिया गया था। कुछ घंटे के बाद ईरान ने जवाब में इजरायल और क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ड्रोन व मिसाइलों की बौछार कर दी। ईरान ने इजरायल समेत जार्डन, सऊदी अरब, बहरीन, यूएई और तमाम देशों के प्रमुख शहरों को निशाना बनाया। अबु धाबी व दुबई में भी धमाके सुने गए।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, दोनों ने ही ईरान से खुद पर खतरा बताते हुए इन हमलों को उचित ठहराया है। वहीं, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस व ओमान ने इस हमले की निंदा की है। लड़ाई छिड़ने के बाद दुनियाभर की एयरलाइंस ने पश्चिम एशिया के लिए अपनी उड़ानें रद कर दी हैं। इजरायल ने ऑपरेशन रोरिंग लायन व अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के नाम से ईरान के खिलाफ अभियान शुरू किया। मिसाइल व ड्रोन हमलों में तेहरान, इस्फहान, कराज व करमानशाह समेत कई शहरों में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं।

इजरायली हमले में सुप्रीम लीडर खामेनेई का आवासीय परिसर पूरी तरह तबाह हो गया। इससे जुड़ी तस्वीरें भी इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित हो गईं। दक्षिणी ईरान के होरमोज्गान प्रांत में स्थित मीनाब शहर में इजरायली हमले में एक प्राइमरी स्कूल में मौजूद करीब 40 छात्राएं मारी गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह हमला ईरान की मिसाइल और परमाणु क्षमता को कमजोर करने की रणनीतिक कोशिश है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के कोने-कोने में बम गिर रहे हैं। इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो संदेश में ट्रंप ने ईरान के लोगों से सत्ता छीनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आपके लिए कई पीढ़ियों में संभवत: ये एकमात्र मौका हो सकता है।

बहरीन स्थित अमेरिका के पांचवे बेड़े के मुख्यालय के पास भी एक मिसाइल गिरी। इससे जुड़े कथित वीडियो फुटेज भी सामने आए, जिसमें मुख्यालय के आसपास काला धुआं उठता देखा गया। इन हमलों में किसी के मारे जाने की पुष्टि नहीं हो सकी है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने स्कूल पर इजरायली हमले की निंदा की है। उन्होंने कहा कि दिनदहाड़े छोटे बच्चों के स्कूल पर हमला किया गया। दर्जनों मासूम बच्चों की हत्या की गई है। इजरायली हमले में मारे गए रिवाल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर पाकपुर ने पिछले साल हुसैन सलामी की मौत के बाद कमान संभाली थी।

सलामी की भी मौत इजरायली हमले में हुई थी। हमलों से ईरान के 31 में से 20 से ज़्यादा प्रांत प्रभावित हुए हैं। ईरान पर हमले शुरू होने के बाद समर्थन में आए कतैब हिजबुल्ला ने कहा है कि वह जल्द ही अमेरिकी ठिकानों पर हमले करेगा। इसके साथ ही यमन के विद्रोही समूह हाउथी ने भी ईरान के समर्थन में लाल सागर में हमले करने की बात कही है। इजरायल समेत पश्चिम एशिया के सभी देशों ने अपनी हवाई रक्षा प्रणालियों को सक्रिय कर दिया है। इजरायल ने दावा किया कि यरूशलम और सेंट्रल इजरायल पर ईरानी हमलों को विफल कर दिया गया।

इजरायल ने अपने नागरिकों को सतर्क करते हुए लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया, स्कूल और कार्यस्थलों को बंद कर दिया गया और अस्पतालों में भर्ती मरीजों को अंडरग्राउंड कर दिया गया। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने देश के नाम संदेश में कहा कि हमारा संयुक्त अभियान ईरान के साहसी लोगों के लिए ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न करेगा जिससे वे अपना भाग्य स्वयं अपने हाथों में ले सकें। वैश्विक असर शुरूहमले के बाद ईरान और आसपास के कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र आंशिक या पूर्ण रूप से बंद कर दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मार्ग बदलने पड़े।

ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता गहरा गई है, क्योंकि दुनिया की बड़ी तेल आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है। ईरान पर हमले के पीछे कई वजहें है। अमेरिका और इजरायल लंबे समय से ईरान पर परमाणु हथियार क्षमता विकसित करने का आरोप लगाते रहे हैं।

हाल के महीनों में परमाणु वार्ताएं ठप पड़ने, क्षेत्र में ईरान समर्थित समूहों की गतिविधियों और सैन्य तैनाती बढ़ने के बाद टकराव लगभग तय माना जा रहा था। इससे पहले भी पिछले साल जून में इजरायल-ईरान के बीच 12 दिनों तक चले सैन्य संघर्ष में अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे।

अमेरिका का दावा है कि ईरान ने परमाणु बम बनाने के स्तर का यूरेनियम संवर्धित कर लिया है, जबकि ईरान इससे इनकार करता रहा है। साथ ही अमेरिका ईरान पर बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को भी रोकने की मांग कर रहा है, जिसे खारिज करते हुए ईरान ने दावा किया है कि उसकी मिसाइलें 2000 किलोमीटर से कम दूरी की हैं। इसके अलावा, ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को भी हमले की वजह माना जा रहा है। मानवाधिकार समूहों के अनुसार, ईरान में सरकारी दमनचक्र में अब तक सात हजार से ज्यादा निर्दोष लोग मारे जा चुके हैं। ईरानी सरकार खुद तीन हजार लोगों के मारे जाने की पुष्टि करती है।

पश्चिम एशिया में स्थित भारतीय दूतावासों ने नागरिकों को सुरक्षित और सतर्क रहने की सलाह दी है। भारत सरकार ने हालिया घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा - ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हाल की घटनाओं पर हम काफी चिंतित हैं। हम सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव को बढ़ाने से बचने की अपील करते हैं।

बयान में कहा गया है- नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए तथा संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान तलाशा जाना चाहिए। भारत ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्रीय संप्रभुता और अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही कहा कि भारतीय दूतावास और मिशन भारतीय नागरिकों के संपर्क में हैं। मिशनों की ओर से एडवाइजरी जारी कर भारतीयों से सतर्क रहने, स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने और दूतावासों के साथ नियमित संपर्क में रहने को कहा गया है।