उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में जीत का हैट्रिक फॉर्मूला तैयार करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बड़ा और कड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। पार्टी प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपने और सहयोगी दलों के विधायकों के काम-काज, जन-छवि और लोकप्रियता का नए सिरे से गुप्त सर्वे कराने जा रही है। इस सर्वे की रिपोर्ट कार्ड के आधार पर ही यह तय होगा कि किस विधायक को दोबारा मैदान में उतारा जाएगा और किसका टिकट कटेगा।
पार्टी नेतृत्व का स्पष्ट संदेश है कि विधायक की व्यक्तिगत छवि और क्षेत्र में पकड़ ही टिकट का एकमात्र पैमाना होगी। इसके लिए किसी भी तरह की गुटबाजी या सिफारिश को दरकिनार कर केवल जमीनी फीडबैक को प्राथमिकता दी जाएगी। पार्टी किसी एक एजेंसी या नेता की रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहना चाहती। इसलिए सर्वे को तीन स्तरों पर गुप्त रखा गया है. बता दें कि सर्वेयर सार्वजनिक स्थलों पर आम जनता से सीधे बात करेंगे और सरकार तथा स्थानीय विधायक की छवि का आकलन करेंगे। इतना ही नहीं सर्वेयर ज़िले के छोटे भाजपा पदाधिकारियों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्थानीय कार्यकर्ताओं से भी फीडबैक लेंगे। क्षेत्र के वकीलों, डॉक्टरों, शिक्षकों, युवाओं, महिलाओं, दुकानदारों और सामाजिक संगठनों से विधायक की कार्यशैली पर चर्चा होगी।
सर्वे में पूछे जाएंगे ये 8 बड़े सवाल
- विधायक की छवि कैसी है? (क्या जनता के बीच उनकी साफ-सुथरी साख है?)
- क्या विधायक जनता के बीच रहते हैं? (क्या वे लोगों की समस्याएं सुनते और सुलझाते हैं?)
- बीते साढ़े चार सालों में क्षेत्र में कितने वास्तविक विकास कार्य हुए हैं?
- विधायक की अपनी जाति और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच कैसी पैठ है?
- क्या विधायक से जुड़ा कोई बड़ा सार्वजनिक विवाद रहा है?
- क्या विधायक पर किसी तरह की अनियमितता या भ्रष्टाचार का आरोप लगा है?
- यदि मौजूदा विधायक को दोबारा टिकट दिया जाए, तो क्या वे चुनाव जीत सकते हैं?
- यदि मौजूदा विधायक के जीतने की संभावना कम है, तो उनका सबसे मजबूत विकल्प कौन हो सकता है?
भाजपा ने 2022 के चुनाव में भी इसी तरह का एजेंसी आधारित सर्वे कराया था, जिसके आधार पर 165 सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया गया था और 120 से अधिक विधायकों के टिकट काट दिए गए थे। इस बार भी जिन विधायकों की नेगेटिव रिपोर्ट आएगी, उनका पत्ता कटना लगभग तय माना जा रहा है। मुस्लिम बहुल इलाकों में मुफ्त राशन जैसी योजनाओं के लाभार्थियों से भी सीधा फीडबैक लिया जाएगा। भाजपा ने उन 61 विधानसभा सीटों पर अलग से विस्तृत सर्वे और डेटा कलेक्शन शुरू किया है, जहां पार्टी लगातार पिछले तीन चुनावों (2012, 2017 और 2022) में हारती आ रही है।
पूर्वी यूपी (22 सीटें): आज़मगढ़, मऊ, जौनपुर, गाज़ीपुर और मिर्ज़ापुर जैसे जिलों की कमजोर सीटों पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
पश्चिम यूपी (13 सीटें): सहारनपुर, मुरादाबाद और बिजनौर की हारी हुई सीटों पर नए जातीय समीकरणों को साधा जा रहा है।
सहयोगी दलों की भूमिका: 2022 में इन 35 सीटों में से 27 सीटें सपा ने जीती थीं। तब रालोद और सुभासपा विपक्षी खेमे में थे, जो अब एनडीए (BJP गठबंधन) का हिस्सा हैं। भाजपा इन सीटों पर अपने नए सहयोगियों के साथ बूथ-स्तरीय रणनीति तैयार कर रही है।