पटना हॉस्टल कांड में 18 साल की मेडिकल छात्रा की मौत के मामले में एक नया मोड़ आया है। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) ने शनिवार को पुलिस को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में पीड़िता के साथ यौन उत्पीड़न की संभावना जताई गई है। शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट परीक्षा की तैयारी कर रही जहानाबाद की एक छात्रा की मौत के मामले में फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. जांच में मृतका के अंतर्वस्त्र पर मानव शुक्राणु (semen) के अवशेष पाए गए हैं, जिससे अब यौन शोषण का मामला और मजबूती से सामने आया है. एसआईटी अब यौन उत्पीड़न के सबूतों की डीएनए प्रोफाइलिंग करवा रही है, ताकि उसे गिरफ्तार अभियुक्तों और अन्य संदिग्धों के साथ मिलाया जा सके. पटना पुलिस के अनुसार, ये कपड़े मृतका के परिवार ने 10 जनवरी को पुलिस को दिए थे और उसके बाद एफएसएल को भेजे गए थे. लेकिन इस भयंकर खुलासे के बाद भी पुलिस की चुप्पी और देरी सवालों को बढ़ा रही है.
बता दें कि इससे पहले ही पीएमसीएच के मेडिकल बोर्ड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया था कि यौन हिंसा को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता. मृतका के शरीर पर कई जगह जख्म और निजी अंगों में चोट के निशान मिले थे जो यौन उत्पीड़न की दिशा में संकेत देते हैं. इसके बाद यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट पटना के AIIMS को भेजी गई थी ताकि विशेषज्ञों की राय से पुष्टि की जा सके. लेकिन नौ दिन गुजरने के बावजूद AIIMS की अंतिम रिपोर्ट अभी तक एसआईटी को नहीं मिली है. AIIMS के चिकित्सकों ने बताया कि उन्हें पूरी मेडिकल फाइल नहीं दी गई है, जिसके कारण वे समीक्षा पूरी नहीं कर पा रहे हैं.
विशेष जांच टीम (SIT) ने राजेंद्र नगर के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों से दोबारा पूछताछ की है. पुलिस यह जानना चाहती है कि जब छात्रा पहली बार अस्पताल लाई गई थी तब उसके सिर पर चोट पहले से थी या गिरने के कारण आई थी. इसके अतिरिक्त, पुलिस 6 जनवरी के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अस्पताल के गेट पर कोई घटना हुई थी या नहीं. इस बीच यह सवाल उठ रहा है कि शुरू से ही मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया. घटना के कुछ दिनों तक हॉस्टल को सील नहीं किया गया और पोस्टमार्टम के निर्देश मिलने में देर हुई, जिससे प्रथम दौर की जांच पर भी संदेह उत्पन्न हुआ. एफएसएल रिपोर्ट में इस बड़े खुलासे के बाद चित्रगुप्त नगर थानेदार रौशनी कुमारी और कदमकुआं थाना के सब इंस्पेक्टर हेमंत झा को सस्पेंड कर दिया गया है।
यह मामला अब मीडिया और जनता की नजर में सिर्फ एक जांच केस नहीं रहा. जांच में हो रही देरी, गलत बयानों और शुरुआती जांच में आत्महत्या की थ्योरी देने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठ रहे हैं. परिवार ने आरोप लगाया है कि शुरुआत में पुलिस मामले को आत्महत्या या दुर्घटना का रूप देने की कोशिश में थी और यौन शोषण के एंगल को दबाने की कोशिश की गई. प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट पर पुलिस ने यह दावा भी किया कि छात्रा नींद की गोलियां लेने और टाइफायड से पीड़ित होने के कारण गंभीर हालत में थी. लेकिन पोस्टमार्टम और FSL के परिणामों ने इस दावे को खोखला साबित कर दिया है.
बता दें कि इस घटना ने आम जनमानस में भारी आक्रोश पैदा किया है. छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गृहणियों ने पुलिस कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की कड़ी मांग की है. हालांकि प्रशासन ने एक विशेष जांच टीम गठित कर दी है, लेकिन पुलिस की जवाबदेही, जवाब देने की देरी और ट्रांसपेरेंसी की कमी को लेकर जनता का भरोसा कम होता जा रहा है. इस बीच एसआईटी अब तीन मुख्य कड़ियों को जोड़ने पर काम कर रही है- FSL रिपोर्ट के सबूत, AIIMS की चिकित्सा समीक्षा और अस्पताल में होने वाली प्रक्रियाओं की सत्यता. जैसे ही AIIMS की फाइनल रिपोर्ट मिलेगी, एसआईटी संभावित आरोपियों के खिलाफ डीएनए मैचिंग समेत आगे की कार्रवाई का ऐलान कर सकती है.