सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों को लेकर बिहार और असम से बड़ी खबर सामने आई है। दोनों राज्यों की सरकारों ने NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेने का फैसला किया है। यह फैसला सीजेपी की चेतावनी के बाद लिया गया है। सीजेपी ने कहा था कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं रोकी गई, तो वह अपना आंदोलन फिर से शुरू कर देगी।
असम सरकार ने सोमवार को कहा कि NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों को लेकर दर्ज सभी पांच मामले वापस लिए जाएंगे। 26 जुलाई की शाम 6 बजे तक इन मामलों में कम से कम 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। राज्य के गृह विभाग ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई और कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। गिरफ्तार लोगों के मामलों की समीक्षा की जाएगी और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें रिहा किया जाएगा।
इससे पहले बिहार सरकार ने भी NEET प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने का फैसला किया था। सरकार ने प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों को रिहा करने का आदेश भी दिया है। बिहार गृह विभाग ने कहा कि 26 जुलाई की शाम 6 बजे से पहले हुए प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR, आपराधिक शिकायतें और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जाएंगे।
बिहार पुलिस के मुताबिक, वामपंथी छात्र संगठनों की ओर से 25 जुलाई को बुलाए गए बिहार बंद के दौरान 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें 339 नाबालिग थे, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। वहीं, 355 लोगों के खिलाफ अलग-अलग कानूनों के तहत मामले दर्ज किए गए थे। सरकार ने कहा है कि इन मामलों में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा किया जाएगा और उनके खिलाफ आगे कोई कार्रवाई नहीं होगी।
दरअसल, सीजेपी ने NEET पेपर लीक आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस लेने की मांग की थी। सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि 25 जुलाई को सरकार के साथ हुई बातचीत में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इसके बाद जंतर-मंतर पर 36 दिनों से चल रहा आंदोलन खत्म किया गया था।
रांका के मुताबिक, सरकार और सीजेपी के बीच सहमति बनी थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस लिए जाएंगे और आगे कोई नई FIR भी दर्ज नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार अपना वादा पूरा नहीं करती और गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया जाता है, तो सीजेपी फिर से आंदोलन शुरू करेगी। CJP ने यह भी मांग की है कि भविष्य में इस आंदोलन से जुड़े छात्रों, आयोजकों और समर्थकों के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज न किया जाए।