National Youth Day 2026: 12 जनवरी 1863 को स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था। उनकी जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन युवाओं को अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी की याद दिलाता है। स्वामी विवेकानंद कहते थे कि शिक्षा को सिर्फ जानकारी जुटाने का माध्यम नहीं बल्कि देश की तरक्की में योगदान के लिए समझना चाहिए ,युवाओं में अपने उत्साह, ऊर्जा और जोश के माध्यम से सकारात्मक बदलाव लाने की शक्ति होती है। राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे नए विचार ला सकते हैं, सामाजिक बुराइयों को चुनौती दे सकते हैं और समानता के लिए काम कर सकते हैं। आज के युवा शक्ति को देखकर यह विश्वास दृढ़ होता है कि भारत का वर्तमान भी सुरक्षित और भविष्य भी उज्ज्वल है।
स्वामी विवेकानंद जी ने युवा शक्ति को राष्ट्र की आत्मा कहा था। उनके अमर शब्द— “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए”— आज भी हर युवा के लिए दिशा और ऊर्जा का स्रोत हैं। विवेकानंद जी का विश्वास था कि जब युवा चरित्रवान, आत्मविश्वासी और सेवा-भाव से युक्त होता है, तभी राष्ट्र महान बनता है। भारत रत्न नानाजी देशमुख और पंडित दीनदयाल उपाध्याय दोनों का मानना था कि राष्ट्र निर्माण की सबसे सशक्त शक्ति उसका युवा वर्ग है। नानाजी देशमुख ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि जब युवा सेवा, त्याग और राष्ट्रभाव से प्रेरित होकर समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए काम करता है, तब ही सच्चा विकास संभव होता है। वहीं पंडित दीनदयाल उपाध्याय की एकात्म मानववाद की सोच युवाओं को यह सिखाती है कि विकास केवल भौतिक प्रगति नहीं, बल्कि नैतिकता, संस्कृति और सामाजिक समरसता के साथ होना चाहिए। उनके अनुसार युवा को केवल सफल व्यक्ति नहीं, बल्कि चरित्रवान, संवेदनशील और समाज के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनना चाहिए। दोनों महापुरुषों का स्पष्ट संदेश था कि जब युवा अपने ज्ञान, ऊर्जा और कौशल को राष्ट्र सेवा से जोड़ देता है, तभी भारत सशक्त और विकसित बनता है।
आज उसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने “विकसित भारत” का संकल्प रखा है। उनका दृष्टिकोण स्पष्ट है— विकसित भारत केवल नीतियों से नहीं, बल्कि जागरूक, सक्षम और जिम्मेदार युवाओं से बनेगा।
प्रधानमंत्री बार-बार कहते हैं कि आज का युवा केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला, केवल समस्या बताने वाला नहीं, बल्कि समाधान देने वाला बने। स्टार्ट-अप, इनोवेशन, डिजिटल तकनीक, आत्मनिर्भर भारत—ये सभी तभी सफल होंगे जब युवा इन्हें राष्ट्र सेवा का माध्यम बनाएंगे। लेकिन हमें यह भी समझना होगा कि विकसित भारत का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति या आधुनिक तकनीक नहीं है।
विकसित भारत का अर्थ है— ईमानदार नागरिक, संवेदनशील समाज, स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण और मजबूत लोकतांत्रिक मूल्य।
युवा संसद ऐसा मंच है जहाँ आप लोकतंत्र को केवल किताबों में नहीं, व्यवहार में सीखते हैं। यहाँ आप बोलना ही नहीं, सुनना, समझना और समाधान देना भी सीखते हैं। यह मंच आपको सिखाता है कि अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
स्वामी विवेकानंद जी के आदर्श और प्रधानमंत्री मोदी जी का विज़न— दोनों का मूल संदेश एक ही है, यदि युवा सही दिशा में सोच ले, तो देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। आज मैं आप सभी युवाओं से यह अपेक्षा करता/करती हूँ कि आप तकनीक में आगे रहें, पर संस्कार न भूलें, आत्मविश्वासी बनें, पर अहंकार से दूर रहें और सफल बनें, पर समाज को साथ लेकर चलें।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस युवा संसद से निकली आपकी सोच, आपका संकल्प और आपका नेतृत्व आने वाले वर्षों में भारत को एक विकसित, आत्मनिर्भर और विश्व में नेतृत्व करने वाला राष्ट्र बनाएगा। उठिए, जागिए और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दीजिए क्योंकि विकसित भारत का सपना, आपसे ही साकार होगा क्योंकि भवन निर्माण में नीव है, चरित्र निर्माण में संस्कार है, राष्ट्र निर्माण में युवा है स्वामी जी कहते थे प्रत्येक राष्ट्र के युवा ज़मीन से जुड़े, राष्ट्र की प्रगति की दिशा में काम करें।