उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तक बीमा की पहुंच बढ़ाने की जरूरत है। बीमारी, दुर्घटना या किसी अन्य विपरीत परिस्थिति में कमजोर परिवारों पर सबसे ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ता है। ऐसे में बीमा आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद कर सकता है। सुरेश खन्ना यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में आयोजित ‘वित्तीय समावेशन-बीमा जरूरी है’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम में बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने हेल्थ इंश्योरेंस, मोटर इंश्योरेंस, क्लेम प्रक्रिया, सरकारी बीमा योजनाओं और वित्तीय समावेशन से जुड़े विषयों की जानकारी दी।
ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा जागरूकता बढ़ाने पर जोर
सुरेश खन्ना ने कहा कि शहरी और आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग में बीमा को लेकर जागरूकता अपेक्षाकृत अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों और कमजोर वर्ग तक बीमा की जानकारी पहुंचाने के लिए अभी और प्रयास की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाएं लोगों को आर्थिक सुरक्षा देती हैं। इन योजनाओं का जितना अधिक प्रचार-प्रसार होगा, उतने ज्यादा लोग इनका लाभ उठा सकेंगे।
बीमा एजेंट लोगों को पूरी जानकारी दें
वित्त मंत्री ने बीमा एजेंटों और कंपनियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एजेंट सिर्फ पॉलिसी कराने तक सीमित न रहें, बल्कि लोगों को प्रीमियम, नवीनीकरण, क्लेम और पॉलिसी की अन्य जरूरी शर्तों की पूरी जानकारी दें। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय स्तर पर लोगों से जुड़े व्यक्तियों के माध्यम से भी बीमा योजनाओं की जानकारी ज्यादा लोगों तक पहुंचाई जा सकती है।
थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की जानकारी जरूरी
सुरेश खन्ना ने वाहनों के थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार लोग जानकारी या लापरवाही के कारण जरूरी बीमा नहीं कराते। दुर्घटना में किसी तीसरे व्यक्ति को नुकसान होने पर इससे बड़ी आर्थिक परेशानी खड़ी हो सकती है। उन्होंने वाहन मालिकों को थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के महत्व के बारे में जागरूक करने की जरूरत बताई।
हेल्थ इंश्योरेंस के क्लेम की जानकारी जरूरी
कार्यक्रम में हेल्थ इंश्योरेंस के क्लेम को लेकर भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि पॉलिसी की शर्तों के अनुसार कुछ मामलों में नेटवर्क या इम्पैनल्ड अस्पताल से बाहर इलाज कराने पर जरूरी दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रीइम्बर्समेंट क्लेम लिया जा सकता है। वित्त मंत्री ने कहा कि पॉलिसीधारकों को अपनी पॉलिसी में उपलब्ध सुविधाओं और क्लेम की प्रक्रिया की पूरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि जरूरत के समय उन्हें परेशानी न हो।
पीएम जन आरोग्य योजना से कमजोर परिवारों को राहत
सुरेश खन्ना ने प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में स्वास्थ्य बीमा और सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं आर्थिक बोझ कम करने में मदद करती हैं।
कार्यक्रम में बताया गया कि पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत द्वितीयक और तृतीयक स्तर के अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलता है।
दूसरे राज्यों में भी इलाज की सुविधा
कार्यक्रम में बताया गया कि योजना से जुड़े सरकारी और इम्पैनल्ड निजी अस्पतालों में पात्र लाभार्थियों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है। योजना में देशभर में पोर्टेबिलिटी की सुविधा भी है। यानी पात्र लाभार्थी दूसरे राज्य में भी योजना से जुड़े अस्पताल में इलाज करा सकता है। उत्तर प्रदेश में इस योजना के वित्तपोषण में केंद्र और राज्य सरकार दोनों की हिस्सेदारी है। इसमें केंद्र की 60 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश सरकार की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई गई।
गांव-गांव तक बीमा पहुंचाने पर जोर
वित्त मंत्री ने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसे मंचों पर वित्तीय समावेशन और बीमा पर चर्चा का उद्देश्य लोगों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ उन्हें ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना भी है।
उन्होंने बीमा कंपनियों, एजेंटों और स्थानीय प्रतिनिधियों से मिलकर काम करने की अपील की, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बीमा के बारे में सही जानकारी मिल सके।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश शासन की सचिव वित्त संदीप कौर, आईआरडीएआई के जीएम पंकज तिवारी समेत बीमा और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।