उत्तर प्रदेश के देवीपाटन मंडल में करीब 30 साल से लंबित नजूल भूमि का विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। गोंडा में मंडलायुक्त कार्यालय और भवन के लिए आरक्षित चार नजूल भूखंडों से जुड़े मामले में संबंधित पक्ष ने न्यायालय में आगे पैरवी न करने का शपथ-पत्र दिया है। साथ ही मौके से करीब 30 साल पुराना कब्जा भी हटा लिया गया है। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की लगातार समीक्षा और निगरानी के बाद इस पुराने मामले में प्रशासन की कार्रवाई तेज हुई। अब प्रशासन का फोकस इन सरकारी भूखंडों को सुरक्षित रखने और निर्धारित शासकीय प्रयोजन में इस्तेमाल करने पर है।
1997 से न्यायालय में लंबित था मामला
यह मामला गोंडा में मंडलायुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित नजूल भूखंड संख्या 514, 515, 524 और 525 से जुड़ा है। प्रकरण वर्ष 1997 से न्यायालय में लंबित था। वर्ष 2008 में स्थगन आदेश जारी होने के बाद भी मामले में कानूनी पैरवी जारी रही। सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के अभियान के दौरान यह पुराना मामला प्रशासन के संज्ञान में आया। इसके बाद मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने मामले की दोबारा समीक्षा शुरू कराई।
जमीन पर संचालित विद्यालय की भी हुई जांच
मामले की जानकारी सामने आने के बाद अभिलेखों और न्यायालयीन स्थिति की जांच कराई गई। अधिकारियों को सरकारी पक्ष मजबूती से रखने और शासकीय हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कानूनी पैरवी के निर्देश दिए गए।
जांच के दौरान भूमि पर एक विद्यालय संचालित होने की जानकारी भी सामने आई। प्रशासन ने मौके पर जाकर स्थिति की जांच की तो वहां कोई विद्यार्थी या शिक्षक नहीं मिला। इसके बाद जमीन की स्थिति पर निगरानी रखी गई।
वादी ने कोर्ट में दिया शपथ-पत्र
प्रकरण में वादी दयानन्द मिश्र की ओर से न्यायालय में शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया। इसमें उन्होंने आगे मामले की पैरवी न करने और कार्यवाही समाप्त किए जाने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही संबंधित पक्ष ने मौके से अपना कब्जा भी हटा लिया। इस तरह करीब तीन दशक पुराने मामले में न्यायालयीन प्रक्रिया के साथ जमीन की भौतिक स्थिति में भी बदलाव आया है।
चारों भूखंडों को सुरक्षित रखने की तैयारी
मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि आयुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित इन चारों भूखंडों को सुरक्षित रखा जाएगा और निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उनके उपयोग की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि शासकीय भूमि के संरक्षण और उसके निर्धारित उपयोग को प्राथमिकता देते हुए लंबे समय से लंबित मामलों की समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में तीन दशक पुराने इस नजूल भूमि प्रकरण की न्यायिक स्थिति के साथ मौके की वास्तविक स्थिति भी जांची गई। अब प्रशासन इन भूखंडों की सुरक्षा और उनके निर्धारित शासकीय उपयोग को सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रहा है।