उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति (2026-29) से निर्यात के साथ-साथ किसानों और उद्योगों को भी फायदा मिल रहा है। शीरे और अनाज की मांग बढ़ने से कृषि उत्पादों के लिए बाजार का विस्तार हो रहा है। वहीं, नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और बंद इकाइयों के दोबारा शुरू होने से प्रदेश में उत्पादन और कारोबारी गतिविधियों को गति मिल रही है।
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात 183 लाख डॉलर रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 117 लाख डॉलर था। इस तरह प्रदेश के निर्यात में 56.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो राष्ट्रीय वृद्धि दर 20.4 प्रतिशत से अधिक है।
अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 66 लाख डॉलर की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा अर्जित की। राष्ट्रीय निर्यात में प्रदेश की हिस्सेदारी भी 9.7 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई। इसके साथ ही निर्यात के मामले में उत्तर प्रदेश चौथे स्थान से तीसरे स्थान पर पहुंच गया।
इस अवधि में निर्यात लाइनों की संख्या 29 से बढ़कर 39 हो गई, जबकि संचालित बंदरगाहों की संख्या सात से बढ़कर 10 हो गई। ये आंकड़े प्रदेश के निर्यात कारोबार के विस्तार की ओर इशारा करते हैं। आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में लागू नीति का लाभ प्रदेश के किसानों तक पहुंच रहा है।
उन्होंने बताया कि अतिरिक्त न्यूट्रल अल्कोहल (ईएनए) का उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग में वृद्धि हुई है। वहीं, अनाज आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने के कारण अनाज की खरीद भी बढ़ी है। इससे किसानों के उत्पादों के लिए मांग बढ़ रही है और कृषि तथा उद्योग के बीच आर्थिक संबंध मजबूत हो रहे हैं।
प्रदेश में आबकारी नीति के साथ नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना का काम भी आगे बढ़ रहा है। उन्नाव में यूनाइटेड ब्रुअरीज और हरदोई में माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। वहीं, फर्रुखाबाद में वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने अपनी इकाई स्थापित की है।
इन इकाइयों से संबंधित क्षेत्रों में उत्पादन और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक अवसर भी बढ़ सकते हैं। मुरादाबाद में एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स ने अपनी बंद इकाई को फिर से सक्रिय किया है। वहीं, गोरखपुर में कियान डिस्टिलरी ने पेय आसवनी और ब्रुअरी स्थापित करने के लिए आवेदन किया है।
आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह के अनुसार, निर्यात के विस्तार से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। नई इकाइयों की स्थापना और बंद इकाइयों के दोबारा शुरू होने से उत्पादन क्षमता बढ़ाने और कारोबारी अवसर पैदा करने में मदद मिल रही है।
नीति में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए नियामकीय शर्तें भी रखी गई हैं। यदि किसी आसवनी या उसके स्वामी की किसी अन्य इकाई अथवा चीनी मिल पर गन्ना मूल्य भुगतान की वसूली के लिए प्रमाण-पत्र प्रभावी है, तो उसे नीति के तहत मिलने वाली छूट नहीं दी जाएगी।
इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नीति का लाभ निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार ही मिले। सरकार को उम्मीद है कि निर्यात में बढ़ोतरी, कच्चे माल की बढ़ती मांग और औद्योगिक इकाइयों के विस्तार से प्रदेश में कृषि और उद्योग दोनों को गति मिलेगी।