उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी मदद बन रही है। इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक प्रदेश में 22,419 जोड़ों का विवाह कराया जा चुका है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अपनी बेटियों की शादी करने में सहारा मिला है।
योजना के तहत सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य गरीब परिवारों पर शादी का आर्थिक बोझ कम करना और दहेज जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने के साथ सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा देना है।
पीलीभीत में सबसे ज्यादा 1,271 बेटियों की शादी
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रदेश में पीलीभीत जिला सबसे आगे रहा है। यहां अब तक 1,271 बेटियों का विवाह कराया जा चुका है। सामूहिक आयोजनों के जरिए अलग-अलग समुदायों के जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जा रहा है। इससे सामाजिक समरसता और सर्वधर्म समभाव को भी बढ़ावा मिल रहा है।
नवदंपतियों को आर्थिक सहायता और गृहस्थी का सामान
इस योजना के तहत नवदंपतियों को नई गृहस्थी शुरू करने के लिए जरूरी उपहार दिए जाते हैं। इसके साथ ही वधू के बैंक खाते में सीधे आर्थिक सहायता भेजी जाती है। सरकार के मुताबिक, बैंक खाते में सीधे राशि पहुंचने से प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है और बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है।
पात्र परिवारों तक लाभ पहुंचाने पर जोर
समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी गरीब परिवार को बेटी की शादी में परेशानी न हो। इसी उद्देश्य से सभी जिलों में पात्र लाभार्थियों का सत्यापन कर सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 22,419 जोड़ों का विवाह कराया जा चुका है। जिन जिलों में कार्यक्रम अभी बाकी हैं, वहां भी तारीखें तय की जा रही हैं। विभाग का लक्ष्य है कि सभी पात्र परिवारों तक योजना का लाभ पहुंचाया जाए।