इंडिया एक्सपो मार्ट में चल रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में बागपत का घेवर लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन (ODOC) पवेलियन में बागपत के स्टॉल पर पहुंच रहे लोग पहले घेवर को बनते देख रहे हैं और फिर उसका स्वाद ले रहे हैं। दिल्ली, गुरुग्राम और गाजियाबाद से आए लोगों ने घेवर की कुरकुराहट और खोये की परत को पसंद किया। आमतौर पर सावन के मौसम में मिलने वाली मिठाई के रूप में पहचाने जाने वाले घेवर की सितंबर में भी बिक्री लोगों के लिए खास आकर्षण बनी हुई है। बागपत के स्टॉल पर ताजा घेवर तैयार कर बेचा जा रहा है।
तीन पीढ़ियों से घेवर बनाने का कारोबार
बागपत के अमीनगर सराय निवासी ईश्वर दयाल अग्रवाल के परिवार में तीन पीढ़ियों से घेवर बनाने का कारोबार चल रहा है। परिवार से जुड़े दीपक गोयल ट्रेड शो में स्टॉल का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई लोग स्टॉल पर पहुंचकर सवाल करते हैं कि घेवर तो सावन में मिलता है, फिर सितंबर में इसकी बिक्री कैसे हो रही है।
दीपक गोयल के अनुसार बागपत में घेवर की मांग केवल सावन तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को अलग-अलग मौसम में बागपत के घेवर की उपलब्धता की जानकारी मिल रही है।
स्टॉल पर सामने तैयार हो रहा ताजा घेवर
ट्रेड शो में बागपत से पांच कारीगर पहुंचे हैं। ये कारीगर स्टॉल पर ही लोगों के सामने ताजा घेवर तैयार कर रहे हैं। घेवर बनाने की प्रक्रिया को देखने के लिए भी लोग स्टॉल पर रुक रहे हैं। दीपक गोयल ने बताया कि ट्रेड शो में रोजाना अच्छी बिक्री हो रही है और घेवर 600 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है। उन्होंने बताया कि घेवर में शुद्ध दूध से तैयार खोये का इस्तेमाल किया जाता है। इसका कुरकुरा बेस और ऊपर जमी खोये की परत इसकी खासियत है।
दिल्ली और पश्चिमी यूपी में भी मांग
बागपत के अलावा दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी घेवर की मांग रहती है। ट्रेड शो में दिल्ली की सोनाली, गुरुग्राम की रवीना कश्यप और गाजियाबाद के धर्मेंद्र भारद्वाज समेत कई लोगों ने घेवर का स्वाद लिया। लोगों ने स्टॉल पर रुककर घेवर तैयार करने की प्रक्रिया भी देखी।
इस बार वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रसिद्ध व्यंजनों को यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में जगह दी गई है। बागपत से घेवर को शामिल किया गया है। इससे जिले की पारंपरिक मिठाई को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों तक पहुंचने का मौका मिल रहा है।