मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन धर्म भारत की मूल परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या की मर्यादा, काशी की चेतना, मथुरा-वृंदावन की भक्ति और प्रयागराज की समरसता को समझे बिना उत्तर प्रदेश और भारत की सांस्कृतिक पहचान को पूरी तरह नहीं समझा जा सकता।
मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को श्री गोरखनाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान-यज्ञ के सप्तम दिवस श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने पूजन और आरती भी की।
उन्होंने कहा कि जब दुनिया के कई हिस्से अंधकार में थे, उस समय भारत के पास सुसभ्य, सुसंस्कृत और समृद्ध परंपरा थी। उन्होंने कहा कि भारतीयों की एक कमी यह रही कि वे अपनी परंपराओं को भूलते गए।
मुख्यमंत्री ने आपदा के बीच भी कथा के आयोजन और श्रद्धालुओं की मौजूदगी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में भीषण आपदा के बावजूद कथा अनवरत चलती रही और श्रद्धालुओं का आना भी जारी रहा।
गौ संरक्षण में समाज की भागीदारी पर जोर
मुख्यमंत्री योगी ने गौ संरक्षण और भारतीय नस्ल के गोवंश के संवर्धन में समाज की भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में भोजन का पहला ग्रास गौ माता और अंतिम ग्रास श्वान के लिए निकालने की व्यवस्था रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार 7,700 से अधिक गोआश्रय स्थलों में 16 लाख से ज्यादा गोवंश का पालन कर रही है। निराश्रित गोवंश को अपने घर पर रखने वाले किसानों को प्रति गोवंश ₹1,500 प्रतिमाह की सहायता दी जाती है। चार गोवंश रखने पर यह राशि ₹6,000 प्रतिमाह होगी।
उन्होंने बताया कि कुपोषित बच्चों वाले परिवारों को गोआश्रय स्थल से ब्याही गाय उपलब्ध कराने के साथ उसके पालन के लिए भी ₹1,500 प्रतिमाह देने की व्यवस्था है। मुख्यमंत्री ने लोगों से गोशालाओं में गाय गोद लेकर गौ संरक्षण में सहयोग करने की भी अपील की।
प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने गौ आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने रासायनिक खाद, केमिकल और पेस्टिसाइड के अत्यधिक इस्तेमाल को खाद्यान्न की गुणवत्ता से जोड़ते हुए प्राकृतिक खेती अपनाने की बात कही।
उन्होंने गोवंश के गोबर और गोमूत्र के इस्तेमाल से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने गोवंश संरक्षण के लिए कानून बनाए हैं, लेकिन दूध लेने के बाद गायों को सड़कों पर छोड़ने वालों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि गोवंश संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज की भागीदारी भी जरूरी है।
महंत दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ की स्मृति में आयोजित हुई कथा
मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ की स्मृति में गोरखनाथ पीठ पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाता है। उन्होंने यजमानों, श्रद्धालुओं और आयोजन से जुड़े लोगों को बधाई दी।
इस अवसर पर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमल देवाचार्य, बाबा मस्तनाथ पीठ रोहतक के महंत बालकनाथ समेत अन्य संतजन और श्रद्धालु मौजूद रहे।