नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त रमेश कृष्णमूर्ति ने बुधवार को कहा कि ईपीएफओ जल्द ही अंतिम भविष्य निधि निकासी दावों के निपटान की प्रक्रिया को स्वचालित करेगा। इससे आवेदक के बैंक खातों में पैसे के अंतरण में तेजी आएगी।
केंद्रीय भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सात करोड़ से अधिक अंशधारक हैं।
वर्तमान में, पांच लाख रुपये तक की आंशिक या अग्रिम निकासी दावों का निपटान स्वचालित रूप से किया जाता है। स्वचालित निपटान के लिए समयसीमा दावा दाखिल करने की तिथि से तीन दिन है।
उद्योग मंडल एसोचैम के नए श्रम संहिता पर आयोजित एक कार्यक्रम में कृष्णमूर्ति ने कहा, ‘‘हम फिलहाल जहां तक संभव हो, स्वचालित निपटान शुरू करने जा रहे हैं...। यह अबतक केवल अग्रिम निकासी के लिए उपलब्ध था। अब हम अंतिम निकासी के लिए भी स्वचालित निपटान शुरू कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि यदि कोई सदस्य नियोक्ता बदलता है, तो ईपीएफओ भविष्य निधि खातों के स्वचालित निपटान और स्वचालित अंतरण की सुविधा भी शुरू कर रहा है।
कृष्णमूर्ति ने कहा, ‘‘अब आपको कोई फॉर्म भरने की जरूरत नहीं है। हम आपके खातों को आपके नये सदस्य खाते में स्वतः अंतरित करने का प्रयास करेंगे।’’
चारों श्रम संहिताओं को पूर्णतः कार्यान्वित करने और उनके अंतर्गत नियम प्रकाशित करने के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि परिभाषाओं और अन्य शब्दों को सरल बनाने, संहिताबद्ध करने और मानकीकृत करने के लिए भरसक प्रयास किए गए हैं।
सरकार ने आठ मई को चारों नई श्रम संहिताओं को अधिसूचित कर दिया है।
कृष्णमूर्ति ने कहा कि ईपीएफओ से संबंधित अगली अधिसूचनाएं शीघ्र ही प्रकाशित की जाएंगी।
नए कानूनी ढांचे के तहत, तीन योजनाएं ... ईपीएफ योजना 1952, कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा योजना 1976 और कर्मचारी पेंशन योजना 1995... भी पुनः अधिसूचित की जाएंगी।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने कोई बड़े बदलाव नहीं किए हैं। हमने अतीत से जो भी सीखा है, उसे शामिल करने का प्रयास किया है। हमने केंद्रीय न्यासी बोर्ड द्वारा हाल ही में अनुमोदित सभी निर्णयों को शामिल किया है, जिनमें निकासी को सरल बनाना और अन्य सुधार शामिल हैं। साथ ही छूट प्राप्त न्यासों से संबंधित प्रावधानों में व्यापक संशोधन भी किया गया है। इन्हें नई योजनाओं में शामिल किया गया है।’’
केंद्रीय श्रम सचिव वंदना गुरनानी ने कहा कि श्रम संविधान की समवर्ती सूची में है और राज्य अपने नियम स्वयं बनाएंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार का सिद्धांत अनुपालन में कमी, कारोबार को सुगम बनाना, व्यापार विस्तार में आसानी और यह सुनिश्चित करना रहा है कि श्रमिकों के साथ कोई अन्याय न हो।
गुरनानी ने कहा कि अब उद्योग जगत की जिम्मेदारी है कि सुधार को केवल अनुपालन सूची के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे एक खुशहाल, स्वस्थ और उत्पादक कार्यबल के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखा जाए।
भाषा रमण अजय
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