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कर्नाटक विस ने ‘झूठी शान के नाम पर हत्या’ निषेध विधेयक और ज्ञान भंडार विधेयक को मंजूरी दी

बेंगलुरु, 23 मार्च (भाषा) कर्नाटक विधानसभा ने ‘झूठी शान’ और परंपरा के नाम पर किए गए अपराधों को रोकने और विवाह संबंधी व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने वाले किसी भी आचरण को दंडित करने के प्रावधान वाले विधेयक 2026 सहित दो विधेयकों को सोमवार को मंजूरी दे दी।

कर्नाटक के विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने विवाह संबंधी विधेयक पेश करते हुए कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य झूठी शान के नाम पर अपराध जैसे सामाजिक मुद्दों का समाधान करना और समाज में संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करना है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह विधेयक सामाजिक परिवर्तन लाने और एक तरह से सामाजिक क्रांति को संभव बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।’’

‘‘कर्नाटक की एकता, स्वतंत्रता, गरिमा और विवाह में परंपरा के नाम पर अपराध रोकने वाला विधेयक, 2026’’ कानूनी सुरक्षा, उपाय और संस्थागत तंत्र प्रदान करने का भी उद्देश्य रखता है, ताकि रोकथाम, निवारण और पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके।

विधेयक के अनुसार, ‘‘भारतीय न्याय संहिता’’ के तहत निर्धारित दंड पर कोई असर डाले बिना, जो कोई भी किसी भी तरीके से किसी दंपति या उसमें से किसी एक सदस्य की हत्या करता है, या कोई ऐसा कृत्य करता है जिससे ‘सम्मान’ के नाम पर किसी की मृत्यु होती है, उसे कम से कम पांच साल के लिए कारावास की सजा दी जाएगी।

इस विधेयक का नाम ‘इवा नम्मवा’ रखा गया है।

विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा, ‘‘इरादा अच्छा है, लेकिन जब कोई कानून बनाया जाता है, तो सरकार को तथ्यों पर विचार करना चाहिए।’’ उन्होंने विशेष रूप से पुराने मैसूरु क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सम्मान की खातिर हत्याओं की बार-बार होने वाली घटनाओं की ओर इशारा किया और नये कानून की आवश्यकता पर स्पष्टता मांगी। बाद में सदन ने विधेयक पारित कर दिया।

सदन ने कर्नाटक ज्ञान भंडार पांडुलिपि एवं डिजिटलीकरण अधिनियम, 2026 को भी अपनी मंजूरी दे दी। पाटिल ने इस विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान राज्य भर में बिखरी हुई प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया।

कर्नाटक विधानसभा ने पेशेवर कर संशोधन विधेयक पास किया।

सदन ने ‘‘कर्नाटक पेशेवर कर, व्यवसाय, कॉलिंग और रोजगार (संशोधन) विधेयक, 2026’’ भी पारित किया, जिसका उद्देश्य करदाताओं के लिए अनुपालन को सरल बनाना और प्रक्रिया संबंधी बोझ को कम करना है।

विधेयक की प्रावधानों का उल्लेख करते हुए राजस्व मंत्री कृष्ण बी. गौड़ा ने सदन में कहा कि यह संशोधन पेशेवर कर का भुगतान करने के बाद रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता को समाप्त करने का प्रयास करता है, जबकि मौजूदा फ्लैट रेट संरचना को बनाए रखा गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘एक बार जब वे 2,500 रुपये का भुगतान कर देते हैं, तो फिर से रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता नहीं है। यह एक सीधी दर है।’’

मंत्री ने यह भी बताया कि पेशेवर कर संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, और जिन व्यक्तियों की आय 25,000 रुपये से अधिक है, उनके लिए वार्षिक अधिकतम सीमा 2,500 रुपये है।

विधानसभा ने स्थानीय निकाय चुनावों में बैलेट पेपर की पुनः शुरुआत को लेकर हुई तीखी बहस के बाद ‘‘कर्नाटक ग्राम स्वराज और पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2026’’ पारित किया।

इस मौके पर विपक्षी भाजपा ने सदन से बहिर्गमन किया। नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक विधेयक की एक प्रति फाड़कर सदन में फेंक दिया और बाहर चले गए।

विधेयक का उद्देश्य ग्राम पंचायत, तालुक पंचायत और जिला पंचायत चुनावों में ‘‘इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन’’ की जगह बैलेट पेपर के उपयोग को मंजूरी देना है।

हालांकि सरकार का मानना है कि यह कदम चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जनता का विश्वास बहाल करने के लिए लिया गया है।

भाषा सुरेश दिलीप

दिलीप