Union Budget: उत्तर प्रदेश में वाराणसी की संकरी गलियों में अर्से से करघों की आवाज गूंजती रही है। ये आवाज है नाजुक धागों से साड़ियां बुनने की, लेकिन अब बुनकर काफी चिंतित हैं। सोने-चांदी के महीन धागों से बुनी जाने वाली बनारसी साड़ियां शहर की सदियों पुरानी विरासत हैं। साड़ियों की बढ़ती लागत और घटती मांग ने उद्योग से जुड़े लोगों की पेशानी पर बल ला दिया है।
केंद्रीय बजट आने में कुछ ही सप्ताह है। साड़ी उद्योग से जुड़े लोगों को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से उम्मीद है कि वे बजट में प्रतिष्ठित उद्योग की चमक फीकी पड़ने से बचाने के प्रावधान रखेंगी।
कई बुनकर पीढ़ियों पुरानी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। वे कहते हैं कि बनारसी साड़ियों की घटती मांग के कारण कई बुनकरों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ा है। वे अपनी रोजी-रोटी चलाने और बनारसी साड़ियों की परंपरा को बनाए रखने के लिए बेहतर मजदूरी की मांग कर रहे हैं।
केंद्रीय बजट की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। बनारसी साड़ियां खास कर शादियों की रौनक मानी जाती हैं, लेकिन इसके बुनकरों को बजट से अपने हुनर को महफूज रखने के लिए घोषणाओं की आस है। केंद्रीय बजट अगले महीने पेश किया जाएगा। ये मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का दूसरा पूर्ण बजट होगा।