जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 28 अप्रैल 2025 को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया है। इस विशेष सत्र में राज्य की सुरक्षा स्थिति, आतंकी घटनाओं पर जवाबी रणनीति और केंद्र से अपेक्षित सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। यह विशेष सत्र ऐसे समय में बुलाया गया है जब पहलगाम आतंकी हमले में 27 लोगों की जान गई, जिनमें से अधिकांश पर्यटक थे। घटना के बाद राज्य भर में राजनीतिक दलों, आम जनता और प्रशासनिक संस्थाओं में तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
विशेष सत्र के लिए सभी राजनीतिक दलों को आमंत्रण भेजा गया है, ताकि व्यापक चर्चा और सामूहिक निर्णय लिए जा सकें। राज्य सरकार चाहती है कि आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति बनाई जाए, जिसमें विपक्षी दलों की भूमिका भी स्पष्ट हो। सत्र के दौरान अनेकों प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की संभावना है, उनमें पहलगाम हमले की विस्तृत रिपोर्ट और जांच की प्रगति, आतंकी संगठनों के खिलाफ जवाबी रणनीति, केंद्र सरकार से विशेष सहायता की मांग, पर्यटकों और धार्मिक यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय और जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक स्थिरता और शांति बनाए रखने की दिशा में प्रस्ताव शामिल है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मनोज सिन्हा ने कहा, "यह विशेष सत्र राज्य की संवेदनशीलता और सुरक्षा को लेकर हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हम हर दल की राय लेकर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर काम करेंगे।"