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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब खुद केस लड़ने वालों के लिए लागू होंगे नए नियम

सुप्रीम कोर्ट ने अपने केस की पैरवी खुद करने वाले लोगों (पार्टी-इन-पर्सन) के लिए नए नियम तय किए हैं। यह फैसला हाल ही में कोर्ट में हुए हंगामे के बाद लिया गया है। जो लोग अपना केस खुद लड़ना चाहते हैं, उन्हें पहले वर्चुअल (ऑनलाइन) सुनवाई का विकल्प दिया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति कोर्ट में खुद उपस्थित होकर बहस करना चाहता है, तो उस मामले की लाइव-स्ट्रीमिंग नहीं होगी। साथ ही, उस सुनवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग भी नहीं की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन नियमों का उद्देश्य अदालत की गरिमा बनाए रखना और कोर्ट की कार्यवाही में बाधा डालने वाली घटनाओं को रोकना है।10 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच में एक व्यक्ति ने सुनवाई के दौरान हंगामा कर दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों (फुल कोर्ट) ने बैठक कर नए नियम लागू करने का फैसला किया।

प्रबल प्रताप नाम का एक व्यक्ति अपने केस की पैरवी खुद करने कोर्ट पहुंचा था। सुनवाई के दौरान उसने जजों से अभद्र भाषा में बात की, मुख्य न्यायाधीश (CJI) के लिए अपशब्द कहे, कोर्ट में कागज फेंके, और कार्यवाही में बाधा डाली। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उसे कोर्टरूम से बाहर निकाल दिया। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रबल प्रताप और उसके साथी चंद्र भान को गिरफ्तार किया। उन पर सरकारी कर्मचारियों से मारपीट और न्यायिक कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है।

हालांकि, जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की बेंच ने उसकी मानसिक स्थिति को देखते हुए उसके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई नहीं की।अक्टूबर 2025 में एक बुजुर्ग वकील ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की थी। उस समय भी सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई नहीं की थी। कोर्ट का मानना था कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल सजा देना ही समाधान नहीं है, बल्कि ऐसे कदम उठाने चाहिए जिनसे भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।