Jharkhand: झारखंड सरकार मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और ग्रामीण आजीविका सुधारने के लिए मत्स्य पालकों को पांच दिनों की बेसिक ट्रेनिंग देती है। इसमें तालाब प्रबंधन, आधुनिक पालन तकनीक, आहार और रोग नियंत्रण सिखाया जाता है। इसके अलावा मत्स्य बीज उत्पादन के लिए तीन दिन की स्पेशल ट्रेनिंग भी दी जाती है।
सरकार प्रशिक्षण के दौरान घर से सेंटर तक आने-जाने का खर्च उठाती है और 200 रुपये प्रतिदिन भत्ता भी देती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 6500 मत्स्य पालकों ने बेसिक ट्रेनिंग ली है, जबकि बीज उत्पादन की ट्रेनिंग 7500 मत्स्य पालकों को दी जा चुकी है।
वर्ष 2024-25 में झारखंड का मत्स्य उत्पादन 3.63 लाख मीट्रिक टन था। 2025-26 का लक्ष्य 4.10 लाख मीट्रिक टन है। अगले पांच साल में एक हेक्टेयर में उत्पादन 10 मीट्रिक टन करने का लक्ष्य है, फिलहाल यह सिर्फ 3 मीट्रिक टन है। तकनीकी प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता से मत्स्य पालकों को लाभ हो रहा है। इसी का परिणाम है कि झारखंड अब मछली उत्पादन में निर्यातक भी बन चुका है।