Gujarat: गुजरात के गांधीनगर में दृष्टिबाधित और नेत्रबाधित बच्चों के लिए बना यह विद्यालय पूरी तरह से संवेदी नेविगेशन पर आधारित है और समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में एक नया मानदंड स्थापित कर रहा है।
गुजरात के सबसे दूर-दराज और जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों की जरूरतों को पूरा करने वाला यह स्कूल न सिर्फ शिक्षा बल्कि गरिमा, स्वतंत्रता और आत्मविश्वास भी देता है। यह परिसर दृष्टिबाधित छात्रों को ध्वनि, स्पर्श और रोशनी का इस्तेमाल कर उन्हें बिना किसी की मदद लिए घूमने-फिरने में सक्षम बनाता है।
इसकी वास्तुकला जानबूझकर बहु-संवेदी रखी गई है। रोशनदान और ऊंची छतें रोशनी और छाया का तीव्र विरोधाभास पैदा करती हैं, जिससे कम दृष्टि वाले छात्रों को मदद मिलती है, जबकि दरवाजों और फर्नीचर पर उच्च-संवेदनशील रंग आसानी से पहचान में मदद करते हैं।
बीचों-बीच बना आंगन बच्चों की बाहरी गतिविधियों का केंद्र है। कक्षाओं को एक गलियारे के साथ व्यवस्थित किया गया है ताकि छात्रों को परिसर का स्पष्ट मानसिक नक्शा बनाने में मदद मिल सके। ध्वनि और स्पर्श चलने में मदद करते हैं क्योंकि छत की ऊंचाई, फर्श का खत्म होना और दीवार की बनावट में बदलाव खास संकेत पैदा करते हैं जो छात्रों को गलियारों और खुले स्थानों में खुलकर घूमने में मदद करते हैं।
स्कूल की वास्तुकला को सोच-समझकर गंध, स्पर्श, श्रवण और दृष्टि की इंद्रियों को शामिल कर तैयार किया गया है। ये छात्रों के लिए मददगार माहौल तैयार करता है। यह अनूठा नजरिया न सिर्फ सीखने को बढ़ावा देता है बल्कि दृष्टिबाधित बच्चों को सशक्त और आत्मनिर्भर भी बनाता है, जिससे उनमें अपने सपनों को साकार करने का आत्मविश्वास पैदा होता है।