Manipur: मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में दो दिन के विरोध प्रदर्शनों के बाद शनिवार सुबह कुछ हिस्सों में सामान्य स्थिति बहाल होने लगी। पुलिस ने ये जानकारी दी। कुकी-जो और हमार समुदायों से ताल्लुक रखने वाले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के तीन विधायकों ने जातीय संघर्ष से प्रभावित राज्य में सरकार बनाने के लिए मेईती विधायकों के साथ हाथ मिलाया, जिसके बाद गुरुवार को हिंसक प्रदर्शनों की शुरुआत हुई।
वाई. खेमचंद सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में विधायक नेमचा किपगेन उप-मुख्यमंत्री बनीं जबकि एल. एम. खौंते और एन. सनाते ने उनका समर्थन किया। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन मुख्य रूप से चुराचांदपुर कस्बे में तुइबोंग और कांगवाई के बीच के क्षेत्र तक ही सीमित रहे, जबकि पहले हिंसा जिला मुख्यालयों तक फैल गई थी। चुराचांदपुर कस्बे के ज्यादातर इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां फिर से शुरू हो गईं लेकिन तुइबोंग क्षेत्र में कई दुकानें बंद रहीं।
पुलिस के मुताबिक, किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। कुकी बहुल चुराचांदपुर में दो आदिवासी संगठनों ने पूर्ण बंद का ऐलान किया जबकि कांगपोकपी और तेंगनुपाल जिलों में रैलियां निकाली गईं, जिनमें विधायकों पर अपने समुदाय के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया गया।
कुकी-जो समूह अपने लिए एक अलग प्रशासनिक इकाई की मांग कर रहे हैं। मई 2023 में भड़की हिंसा ने राज्य को जातीय आधार पर बुरी तरह से विभाजित कर दिया और दोनों समुदायों के सदस्य एक-दूसरे के क्षेत्रों में जाने से कतराते हैं। जातीय संघर्षों में 260 से अधिक लोग मारे गए थे और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। बुधवार को सिंह के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले राज्य में एक वर्ष से राष्ट्रपति शासन लागू था।
इस बीच, जोमी जनजाति की सर्वोच्च संस्था जोमी परिषद ने सरकार में शामिल हुए तीनों विधायकों को तीन दिनों के भीतर कार्यालय में पेश होने के लिए तलब किया है। चुराचांदपुर स्थित नागरिक संगठन ने शुक्रवार रात को जारी एक बयान में कहा कि इन विधायकों को इस उम्मीद के साथ चुना गया था कि वे समुदाय के अधिकारों, आवाजों और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करेंगे।
बयान में कहा गया है कि हालांकि, उनके हालिया कार्यों से जनता में व्यापक आक्रोश फैल गया है। परिषद ने चेतावनी दी कि अगर विधायक पेश नहीं हुए तो वह उचित संगठनात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य होगी जिसमें जोमी परिषद परिसर में प्रवेश पर रोक लगाना भी शामिल है।