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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ ‘इकोनॉमिक D-डे’ की घोषणा की

America:  ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को करीब छह महीने होने वाले हैं, इस बीच अमेरिका के पास कुछ अहम हथियारों का स्टॉक कम होने की खबरों के बीच ट्रंप प्रशासन अब ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के खिलाफ एक बड़े आर्थिक अभियान का संकेत दिया है। इसे “इकोनॉमिक D-Day” कहा जा रहा है। इसका मकसद ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर उसे अपनी नीतियों में बदलाव के लिए मजबूर करना है। ईरान पिछले करीब 50 साल से अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। नए आर्थिक कदमों से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हफ्ते ईरान के खिलाफ बड़ा आर्थिक अभियान चलाने का ऐलान किया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान पर अभूतपूर्व आर्थिक दबाव और अलगाव बढ़ाएगा। अमेरिका का मकसद ईरान के नेतृत्व पर दबाव बनाना है, ताकि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने की मांग मान सके। इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि ईरान तेल और प्राकृतिक गैस ले जाने वाले जहाजों के लिए अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को पूरी तरह खोल दे।

यह स्थिति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। ईरान के साथ युद्ध को खत्म करने में उन्हें मुश्किल हो रही है, जबकि यह युद्ध लोगों के बीच ज्यादा लोकप्रिय नहीं है। इसके साथ ही अमेरिका में मध्यावधि चुनाव भी कुछ महीनों बाद होने हैं। इन चुनावों से तय होगा कि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस में अपना नियंत्रण बनाए रख पाती है या नहीं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका की ताकत का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका मकसद ईरान को अपनी मांगें मानने के लिए मजबूर करना है। इसके लिए अमेरिका ईरान पर पहले से लगे प्रतिबंधों को और सख्त कर रहा है। ईरान दुनिया के उन देशों में शामिल है, जिन पर सबसे ज्यादा आर्थिक प्रतिबंध लगे हुए हैं।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका की नई धमकियों पर जवाब दिया है। उन्होंने शुक्रवार को एक्स पर ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों का इतिहास साझा किया।अराघची ने कहा कि ईरान पहले भी ऐसे अमेरिकी प्रतिबंधों और दबाव का सामना कर चुका है। उन्होंने अमेरिका के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि यह सब पहले भी देखा जा चुका है। ईरान पर सख्त कार्रवाई के समर्थकों ने अराघची के इस बयान की तारीफ की है। वहीं, कुछ जानकारों का कहना है कि ट्रंप पहले के अमेरिकी नेताओं के अनुभवों से सबक नहीं ले रहे हैं।

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को सीएनबीसी को दिए एक इंटरव्यू में ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों और कंपनियों पर भी सेकेंडरी प्रतिबंध लगा सकता है।

अमेरिकी प्रशासन ने अभी यह साफ नहीं किया है कि ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी’ के अगले चरण में किन देशों या कंपनियों को निशाना बनाया जाएगा। इस अभियान के पिछले चरण में उन लोगों और संस्थाओं पर कार्रवाई की गई थी, जो ईरान से तेल खरीदते हैं या ईरान के साथ बैंकिंग कारोबार करते हैं। चीन और भारत ईरान के तेल के बड़े खरीदारों में शामिल हैं।

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों और कंपनियों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई ईरान के साथ कारोबार जारी रखता है, तो अमेरिकी सरकार उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकती है। बेसेंट ने यह भी कहा कि अब अमेरिका के सहयोगी देशों और बाकी दुनिया को अपना फैसला करना होगा। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का बढ़ता आर्थिक दबाव नई और अनिश्चित स्थिति पैदा कर सकता है।इससे ईरान पर भी कोई बड़ा कदम उठाने का दबाव बढ़ सकता है।