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स्वनिर्वासन में 17 साल रहने से लेकर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद तक, रहमान ने तय किया लंबा सफर

Bangladesh: स्वनिर्वासन में 17 साल तक लंदन में रहे तारिक रहमान ने बांग्लादेश के राजनीतिक फलक पर शानदार वापसी की और अपने पिता द्वारा गठित बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को 20 साल के अंतराल के बाद फिर से सत्ता में ला दिया। बीएनपी अध्यक्ष रहमान (60) ने मंगलवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। वे पहली बार प्रधानमंत्री बने हैं। बीएनपी की स्थापना तारिक रहमान के पिता जियाउर रहमान ने की थी, जो एक सैन्य शासक से राजनीतिज्ञ बने थे।

तत्कालीन राष्ट्रपति जियाउर रहमान की 1981 में हत्या के बाद लगभग चार दशक तक पार्टी का नेतृत्व तारिक की मां खालिदा जिया ने किया। पिछले साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटने पर उनका जोरदार स्वागत हुआ था, लेकिन उसके पांच दिन बाद ही रहमान को व्यक्तिगत त्रासदी का सामना करना पड़ा जब उनकी मां खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। देश में 12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनावों में बीएनपी ने 297 में से 209 सीटें जीतीं, जबकि कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें हासिल कीं।

आम चुनावों से पहले जब बीएनपी राजनीतिक रूप से हाशिए पर थी, तारिक रहमान ने बीएनपी के अध्यक्ष का पदभार संभाला। बदलते हालात ने उन्हें व्यक्तिगत क्षति के बीच कुछ निजी समय बिताने का मौका नहीं दिया। रहमान को भी वंशवादी राजनीति की उपज के रूप में देखा जाता है, लेकिन उनके परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि ने उन्हें एक प्रकार की दूरदर्शिता प्रदान की है।

दिसंबर में बांग्लादेश लौटने के कुछ घंटों बाद रहमान ने कहा था, ‘‘मेरे पास अपने देश के लोगों और अपने देश के लिए एक योजना है।’’ मृदुभाषी रहमान ने चुनाव प्रचार में अपनी पार्टी का नेतृत्व करते हुए अपार जनसमूह को आकर्षित किया। उन्होंने भड़काऊ बयानबाजी से परहेज करने और संयम और सुलह के आह्वान का रूख अपनाया।

रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को ढाका में हुआ था। बचपन में उन्होंने 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम को देखा। उन्हें अपनी मां और भाई के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन 16 दिसंबर 1971 को उन्हें रिहा कर दिया गया, जब बांग्लादेश को पाकिस्तान से स्वतंत्रता मिली।

उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंध का अध्ययन किया, लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी। बाद में उन्होंने कपड़ा और कृषि उत्पादों के व्यवसाय शुरू किए। वे 2009 में बीएनपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुने गए और धीरे-धीरे पार्टी के पुनर्गठन में शामिल हो गए।

अवामी लीग के शासनकाल में रहमान भ्रष्टाचार और अपराध के कई मामलों को लेकर निशाने पर आ गए। कुछ मामलों में उन्हें उनकी गैर-मौजूदगी में दोषी करार दिया गया। साल 2004 में अवामी लीग की नेता शेख हसीना की रैली पर हुए ग्रेनेड हमले के सिलसिले में रहमान को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इस हमले में 24 लोग मारे गए थे और दर्जनों घायल हुए थे।

रहमान ने हमेशा इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए इनका खंडन किया। हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद मोहम्मद यूनुस के अंतरिम शासनकाल में उन्हें सभी मामलों में बरी कर दिया गया।

जब खालिदा जिया को 2018 में भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भेजा गया, तो रहमान को बीएनपी का कार्यवाहक अध्यक्ष नामित किया गया था। रहमान 2008 में ये कहते हुए विदेश चले गये थे कि उन्हें इलाज की जरूरत है। उससे पहले सेना समर्थित कार्यवाहक सरकार के तहत उन्हें हिरासत से छोड़ा गया था।