हरियाणा विधानसभा की सरगर्मियों के बीच कुमारी सैलजा का नाम इस समय सबसे ज्यादा चर्चाओं में है। कांग्रेस के अंदर खटपट चल रही है इसके कई संकेत मिल चुके हैं। सबसे पहला संकेत 18 सितंबर 2024 को मिला जब काग्रेंस ने हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए अपना घोषणा पत्र जारी किया। इस दौरान पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, भुपेंद्र सिंह हुड्डा भी मौजूद रहे लेकिन पार्टी का एक बड़ा दलित चेहरा कुमारी सैलजा यहां नजर नहीं आई। पार्टी प्रचार में भी कुमारी सैलजा इतनी एक्टिव नजरा नहीं आ रही हैं। जमीनी स्तर पर चुनाव प्रचार से सैलजा ने मानों दूरी बना ली है। जिसके बाद ये सवाल उठना लाजमी था कि क्या सैलजा नाराज हैं?
कुमारी सैलजा की नाराजगी की वजह
टिकट बटवांरे में अनदेखी के चलते कुमारी सैलजा नाराज हैं क्योंकि टिकट बटवांरे में हुड्डा समर्थकों को ज्यादा तवज्जो दी गई। टिकट बटवांरे के आखिरी दिन नारनौंद में कांग्रेस उम्मीद्वार की व्यक्तिगत टिप्पणी से सैलजा आहत हैं। इस मामले को लेकर जगह-जगह विरोध भी किया गया था। जिसके बाद मनोहर लाल ने सैलजा को पार्टी में आने का ऑफर भी दिया था।
चुनाव से पहले भी दिखे मतभेद
हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले ही पार्टी में सीएम की कुर्सी को लेकर लड़ाई छिड़ गई थी। पूर्व सीएम भुपेंद्र हुड्डा गुट के 'हरियाणा मांगे हिसाब' अभियान के बराबर सांसद कुमारी सैलजा ने 'कांग्रेस संदेश यात्रा' का एलान कर दिया था. इसके बाद पोस्टर को लेकर भी हुड्डा-सैलजा गुट आमने-सामने आ चुके हैं जिसकी वजह मुख्यमंत्री की कुर्सी की दावेदारी मानी जाती है।
हरियाणा में 21 सीटों पर कुमारी सैलजा का प्रभाव
हरियाणा में 17 रिजर्व सीटें हैं। इसके अलावा सिरसा, फतेहाबाद, अंबाला और पंचकूला सीट पर सैलजा का प्रभाव माना जाता है। एसे में करीब 21 सीटें हैं जिनपर कुमारी सैलजा प्रभाव रखती हैं। यही वजह है कि उनकी नाराजगी कांग्रेस को चुनावों में भारी पड़ सकती है।