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क्या हैं भारत के चार नए श्रम कानून? जिन पर आम लोगों और हितधारकों से मांगी गई राय

केंद्र सरकार ने चार नए श्रम कानून पेश किए हैं जिनका मकसद काम, वेतन और कर्मचारियों के अधिकारों को विनियमित करने के तरीके को आसान और आधुनिक बनाना है। ये कानून वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा समेत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों को कवर करते हैं। ये कानून पहले ही पास हो चुके थे, लेकिन सरकार ने अब इन्हें पूरी तरह से लागू करने के लिए मसौदा नियम जारी किए हैं। इन पर आम लोगों और हितधारकों से राय मांगी गई है।

मसौदा नियमों के लागू होने के बाद कर्मचारियों के लिए अनिवार्य नियुक्ति पत्र, 40 साल या उससे अधिक आयु के श्रमिकों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच, समान कार्य के लिए समान वेतन और महिलाओं के लिए सभी सेक्टर में अलग-अलग पालियों में समान मौके जैसी सुविधाएं पक्की होंगी।

केंद्र सरकार का लक्ष्य एक अप्रैल से चारों श्रम कानूनों को पूरे देश में लागू करना है। श्रम मामलों के संविधान की समवर्ती सूची में शामिल होने से ये जरूरी है कि राज्यों के स्तर पर भी इनके लिए नियम बनाए जाएं। केंद्र के अनुसार, ये नियम श्रमिकों को बेहतर सुरक्षा देंगे, साथ ही नियमों का पालन सरल बनाने और श्रमिकों के हितों की रक्षा करने में मदद करेंगे।