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एम्स ऋषिकेश के दीक्षांत समारोह में पहुंचे उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, बोले कोविड के दौरान भारत बना वैश्विक साझेदार

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गुरुवार को एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया और कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की वैश्विक भूमिका को रेखांकित किया। इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि कुछ साल पहले देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की कड़ी परीक्षा हुई, लेकिन भारत ने एक वैश्विक भागीदार के रूप में उभरते हुए 100 से अधिक देशों को कोविड वैक्सीन भेजी और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को मजबूत किया।

उन्होंने एम्स ऋषिकेश की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान आधुनिक चिकित्सा, शिक्षा, शोध, तकनीकी नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता का बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा है। उन्होंने टेलीमेडिसिन जैसी पहलों की भी प्रशंसा की और कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि दूरदराज और वंचित क्षेत्रों तक पहुंचनी चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में देशभर में नए एम्स संस्थानों की स्थापना से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल शिक्षा तक पहुंच मजबूत हुई है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सुविधाएं पहले सीमित थीं।  उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक जिम्मेदारी है और चिकित्सा पेशेवरों की राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों से अपील की कि वे निवारक देखभाल, ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं, शोध और नवाचार पर ध्यान दें और संवेदनशीलता, ईमानदारी और सेवा भाव के मूल्यों का पालन करें।

उत्तराखंड के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियां अधिक हैं, लेकिन एम्स ऋषिकेश ने एक साधारण अस्पताल से कहीं बढ़कर भूमिका निभाई है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार की भी सराहना की और कहा कि चारधाम यात्रा और दूरदराज के इलाकों में ड्रोन के माध्यम से आपातकालीन दवाइयां पहुंचाना एक सराहनीय पहल है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को पहाड़, दूरी, मौसम और समय की बाधाओं को पार करते हुए हर व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।