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वक्फ अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई

वक्फ संशोधन कानून 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं का दौर जारी है, जहां कई राज्य समर्थन में हैं तो कुछ इसे चुनौती दे रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह कानून मुस्लिम समुदाय को अनुचित लाभ देता है और गैर-मुसलमानों के साथ भेदभाव करता है। विपक्षी दलों के विरोध के बीच संसद से पारित होकर कानून बन चुके वक़्फ़ (संशोधन) एक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होगी। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। करीब 73 याचिकाएं वक्फ एक्ट के खिलाफ दायर की गई हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख ओवैसी, एसोसिएशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स के अरशद मदनी समेत कई लोगों ने याचिकाएं दाखिल की हैं। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अब तक 10 याचिकाओं को सूचीबद्ध किया है। इस मुद्दे पर कई नयी याचिकाएं भी शीर्ष अदालत में दायर की गई हैं जिन्हें सूचीबद्ध किया जाना है।

वक्फ संशोधन कानून 2025 को चुनौती देने के लिए दर्जनभर याचिकाएं दायर की गई हैं। अब असम, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हरियाणा और महाराष्ट्र ने भी सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप आवेदन दायर कर इस कानून का समर्थन किया है और अपना पक्ष रखने की इजाजत मांगी है। इस मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दायर कर कोई भी आदेश पारित करने से पहले मामले की सुनवाई किए जाने का अनुरोध किया था। दरअसल, कविएट किसी पक्षकार द्वारा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में यह सुनिश्चित करने के लिए दायर की जाती है कि इसे सुने बिना कोई आदेश पारित नहीं किया जाए। केंद्र सरकार ने हाल में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को अधिसूचित किया था। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ( AIMPLB), जमीयत उलेमा-ए-हिंद, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK), कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और मोहम्मद जावेद अन्य प्रमुख याचिकाकर्ता हैं। 

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में मूल वक्फ अधिनियम, 1995 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली नई जनहित याचिका (PIL) भी दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह कानून मुस्लिम समुदाय को अनुचित लाभ देता है और गैर-मुसलमानों के साथ भेदभाव करता है। याचिकाकर्ता एडवोकेट हरी शंकर जैन और मणि मुनजल ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका दाखिल की है और वक्फ अधिनियम, 1995 की धाराओं 3(r), 4, 5, 6(1), 7(1), 8, 28, 29, 33, 36, 41, 52, 83, 85, 89, 101 को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि ये धाराएं संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 27 और 300A का उल्लंघन करती हैं।

7 अप्रैल को जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने दायर की थी याचिका

7 अप्रैल को चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल को याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर विचार करने का आश्वासन दिया था। एआईएमपीएलबी ने 6 अप्रैल को शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। अधिवक्ता लजफीर अहमद के मार्फत दायर ओवैसी की याचिका में कहा गया है कि वक्फ को दिए गए संरक्षण को कम करना मुसलमानों के प्रति भेदभाव है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 15 का उल्लंघन है।

उधर, वक्फ कानून के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक नया अभियान शुरू किया है जिसका नाम वक्फ बचाव अभियान दिया गया है। इस अभियान का पहला चरण कुल 87 दिनों तक चलेगा। यह 11 अप्रैल से शुरू हो चुका है और 7 जुलाई तक चलेगा। इसे साथ ही वक्फ कानून के विरोध में एक करोड़ लोगों के हस्ताक्षर लिए जाएंगे। इसके बाद अगली रणनीति तय की जाएगी।