Share Market: कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और आईटी कंपनियों के शेयर में भारी बिकवाली से सेंसेक्स और निफ्टी में शुक्रवार को एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी, वैश्विक बाजारों में नकारात्मक रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार व्यवधान ने कारोबारियों के बीच निराशा को और बढ़ा दिया।
बीएसई सेंसेक्स 999.79 अंक या 1.29 प्रतिशत टूटकर 76,664.21 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,260.13 अंक या 1.62 प्रतिशत फिसलकर 76,403.87 अंक तक चला गया था। एनएसई निफ्टी 275.10 अंक या 1.14 प्रतिशत लुढ़ककर 23,897.95 अंक पर बंद हुआ।
बाजार विशेषज्ञ पुरातन भारती के मुताबिक, “दो हफ्ते पहले जैसी स्थिति थी, वैसी ही स्थिति फिर से बन गई है। ईरानी नौसेना और अमेरिकी नौसेना द्वारा नाकाबंदी जारी है। भारत की बात करें तो, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर होने और भारतीय रुपये का मूल्य घटकर 94 रुपये होने के दबाव में है। इन दोनों कारकों के कारण निफ्टी पर दबाव पड़ रहा है और यह संस्थागत बाजार में वापस आ गया है, यानी 24,000 के स्तर से नीचे, जो हमारा प्रमुख समर्थन स्तर रहा है।”
सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से इन्फोसिस का शेयर सबसे अधिक 7.09 प्रतिशत टूटा। इसके अलावा एचसीएल टेक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टेक महिंद्रा, सन फार्मा, एशियन पेंट्स और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर भी नुकसान में रहे। ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 2.17 प्रतिशत की तेजी के साथ 107.3 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 3,254.71 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और चीन का शंघाई कम्पोजिट गिरावट के साथ बंद हुए जबकि जापान का निक्की तथा हांगकांग का हैंगसेंग बढ़त के साथ बंद हुए। यूरोप के बाजार दोपहर तक गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।