भारतीय शेयर बाजार बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुआ। एशियाई बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और बाजार में कई सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। BSE सेंसेक्स 325.78 अंक यानी 0.42 प्रतिशत गिरकर 76,909.68 पर बंद हुआ। वहीं, NSE निफ्टी 50 में 76.60 अंक यानी 0.32 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 24,078.30 पर बंद हुआ। इस दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.72 प्रतिशत बढ़कर 91.75 डॉलर प्रति बैरल हो गई। वहीं, कच्चे तेल की कीमत 0.98 प्रतिशत बढ़कर 85.79 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई।
भारत के अलावा कई एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट रही।
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जापान का निक्केई 225 3.19 प्रतिशत गिरा।
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दक्षिण कोरिया का KOSPI 6.16 प्रतिशत टूटा।
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ताइवान इंडेक्स 1.32 प्रतिशत गिरा।
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इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट 0.86 प्रतिशत नीचे रहा।
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सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.13 प्रतिशत गिरा।
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हांगकांग का हैंग सेंग 0.04 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ।
बाजार की गिरावट के बीच IT कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। Nifty IT इंडेक्स 0.60 प्रतिशत चढ़ा। वहीं, Nifty Media में 1.09 प्रतिशत, Nifty Chemicals में 1.06 प्रतिशत और Nifty FMCG तथा Nifty Oil & Gas में 0.70-0.70 प्रतिशत की गिरावट आई। Nifty Auto 0.50 प्रतिशत, Nifty Realty 0.42 प्रतिशत और Nifty Pharma 0.21 प्रतिशत नीचे रहा।
निफ्टी के शेयरों में HCL Technologies 1.85 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे बड़ा गेनर रहा। इसके अलावा Eternal, Sun Pharma, Kotak Mahindra Bank और JSW Steel के शेयरों में भी तेजी रही। Wipro, Infosys, TCS, SBI Life Insurance और Titan Company के शेयर भी बढ़त के साथ बंद हुए।
दूसरी ओर, Power Grid Corporation का शेयर 1.98 प्रतिशत गिरकर सबसे बड़ा लूजर रहा। Max Healthcare Institute, Coal India, Jio Financial Services और Bajaj Finance के शेयरों में भी गिरावट आई। ITC, Apollo Hospitals Enterprise, Reliance Industries, ICICI Bank और Tata Steel भी नुकसान में रहे।
Geojit Investments Limited के रिसर्च हेड विनोद नायर के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स जारी होने से पहले निवेशक सतर्क रहे। वहीं, अमेरिका-ईरान सीजफायर खत्म होने के बाद भी कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकलने से कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। इससे बाजार में दबाव बढ़ा है। उन्होंने कहा कि आगे बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की सप्लाई और उसकी कीमतों की स्थिति पर निर्भर करेगी।