भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की आज150वीं जयंती पूरे देश में गर्व और सम्मान के साथ मनाई जा रही है। स्वतंत्र भारत के एकीकरण में उनका योगदान अतुलनीय है। उन्होंने 562 रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत का निर्माण किया। उनके दृढ़ संकल्प, अदम्य साहस और देशप्रेम के कारण ही उन्हें "लौह पुरुष" की उपाधि मिली। सरदार पटेल ने न केवल राजनीतिक एकता स्थापित की, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को भी मजबूत नींव दी। उन्होंने भारतीय सिविल सेवा को “स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया” कहा और उसे देश की रीढ़ बताया। उनके विचार आज भी प्रेरणा स्रोत हैं — एकता, अनुशासन और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संदेश हर पीढ़ी के लिए प्रासंगिक है।
150वीं जयंती के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम, प्रदर्शनी और रैलियां आयोजित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के केवडिया स्थित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। सरदार पटेल का जीवन हमें सिखाता है कि सच्चा नेतृत्व वही है जो राष्ट्र के हित को व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर रखे। उनकी जयंती “राष्ट्रीय एकता दिवस” के रूप में मनाई जाती है, जो भारत की एकता और अखंडता का प्रतीक है।
भारत के इतिहास में कुछ ऐसे महान व्यक्तित्व हुए हैं, जिन्होंने अपने कर्म, साहस और दूरदर्शिता से राष्ट्र की दिशा बदल दी। उन्हीं में से एक नाम है — सरदार वल्लभभाई पटेल, जिन्हें आज पूरा देश “भारत के लौह पुरुष” के नाम से जानता है। 2025 में जब देश उनकी 150वीं जयंती मना रहा है, तो यह केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और योगदान को दोबारा जीवंत करने का अवसर है।
सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाड में हुआ। एक सामान्य किसान परिवार में जन्मे पटेल बचपन से ही साहसी और आत्मनिर्भर थे। उन्होंने अपनी पढ़ाई कठिन परिस्थितियों में पूरी की। कहा जाता है कि उन्होंने एक बार खुद अपने घाव पर गर्म लोहे की छड़ लगाकर उसे ठीक किया — इस घटना ने उनके ‘लौह पुरुष’ व्यक्तित्व की झलक बचपन में ही दे दी थी। लंदन जाकर वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे भारत लौटे और अहमदाबाद में वकालत करने लगे। परंतु अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों और देश के दयनीय हालात देखकर उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रसेवा को समर्पित कर दिया।
स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका
पटेल महात्मा गांधी से गहराई से प्रभावित थे। गांधी के असहयोग आंदोलन और बारडोली सत्याग्रह में उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई।
1928 में जब ब्रिटिश सरकार ने किसानों पर बढ़ा हुआ लगान लगाया, तब पटेल ने किसानों को एकजुट कर अंग्रेजों के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन चलाया। यह आंदोलन सफल रहा और ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा। इसके बाद उन्हें “सरदार” की उपाधि मिली, जिसका अर्थ होता है — नेता।
1947 में जब भारत स्वतंत्र हुआ, तब सबसे बड़ी चुनौती थी — 562 रियासतों का एकीकरण। अंग्रेजों के जाने के बाद भारत विभाजन की पीड़ा झेल ही रहा था, ऐसे में ये रियासतें स्वतंत्र रहना या पाकिस्तान में शामिल होना चाहती थीं। देश को टुकड़ों में बिखरने से बचाने का जिम्मा सरदार पटेल ने उठाया।उनकी कूटनीति, दृढ़ता और राजनीतिक बुद्धिमत्ता ने चमत्कार कर दिखाया। हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसी जटिल रियासतों को भारत में मिलाने के लिए उन्होंने कभी बातचीत, कभी सख्ती और कभी रणनीति अपनाई। उनकी सूझबूझ से ही आज हम अखंड भारत के रूप में गर्व से खड़े हैं।
इतिहासकार कहते हैं — “अगर पटेल न होते, तो आज भारत सैकड़ों छोटे-छोटे देशों में बंटा होता।”
पटेल का मानना था कि देश को मजबूत प्रशासन की आवश्यकता है। उन्होंने भारतीय सिविल सेवा (ICS) को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के रूप में नया जीवन दिया और उसे “स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया” कहा। उनकी सोच थी कि एक सशक्त प्रशासनिक तंत्र ही लोकतंत्र को स्थिरता दे सकता है। उनके द्वारा रखी गई प्रशासनिक व्यवस्था आज भी भारत की रीढ़ मानी जाती है।
सरदार पटेल ने कभी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए राजनीति नहीं की। उनका हर निर्णय राष्ट्रहित में होता था। वे कहते थे — “देश की एकता हमारी सबसे बड़ी ताकत है। अगर हम एक रहेंगे, तो कोई हमें कमजोर नहीं कर सकता।” आज जब देश उनकी 150वीं जयंती मना रहा है, तब यह आवश्यक है कि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन और समाज में उतारें — एकता, दृढ़ निश्चय और सेवा भावना।
2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के केवडिया में “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” का उद्घाटन किया। 182 मीटर ऊंची यह प्रतिमा विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति है, जो सरदार पटेल के आदर्शों और योगदान की याद दिलाती है। हर वर्ष यहां लाखों लोग उनके दर्शन के लिए आते हैं, और देश के इस महानायक को नमन करते हैं। सरदार पटेल का जीवन इस बात का प्रतीक है कि अगर इरादे मजबूत हों तो असंभव भी संभव हो जाता है। उन्होंने जो भारत को एक सूत्र में पिरोया, वह केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक एकता भी थी। उनकी 150वीं जयंती पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि “हम उस भारत को और मजबूत बनाएंगे, जिसकी नींव सरदार पटेल ने रखी थी।”