दिल्ली-एनसीआर में बढ़ता प्रदूषण एक गंभीर जन स्वास्थ्य चिंता बनता जा रहा है। डॉक्टर चेतावनी दे रहे हैं कि प्रदूषित हवा न केवल सांस की सेहत बल्कि पेट, रोजाना की जीवनशैली की आदतों और दिमाग की सेहत को भी प्रभावित कर रही है। प्रदूषित हवा के लंबे समय तक संपर्क में रहने से सभी उम्र के लोगों में स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें बढ़ रही हैं, जो रोकथाम के उपायों और जीवनशैली में बदलाव की तत्काल जरूरत को उजागर करता है।
डॉक्टर का कहना है कि प्रदूषण गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं को बढ़ाता है क्योंकि लोग अनजाने में प्रदूषित कणों को अंदर ले लेते हैं। ये कण पेट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे पेट की परत को नुकसान पहुंचता है और टॉक्सिन शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। प्रदूषण हार्मोन को भी बाधित करता है, जिससे मतली और गैस बनने जैसी समस्याएं होती हैं। दूसरे सामान्य लक्षणों में जीईआरडी, पेट दर्द, सूजन, दस्त, कब्ज और मल त्याग की आदतों में बदलाव शामिल हैं।
दिल्ली में प्रदूषण का ज्यादा स्तर लोगों की रोजाना की जिंदगी पर असर डाल रहा है। खराब हवा की वजह से कई लोगों ने बाहर व्यायाम करना, जिसमें टहलना भी शामिल है, बंद कर दिया है। सर्दियों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ जाता है, जिससे हालात और खराब हो जाते हैं। लोगों को सलाह दी जा रही है कि बेवजह बाहर न निकलें, खासकर व्यस्त यातायात घंटों के दौरान। सुझाव दिए जा रहे है कि दोपहर में टहलने जाएं, व्यस्त सड़कों से बचें और जब मौसम धूप वाला हो तो पार्क में जाएं। ये भी सलाह दी जा रही है कि मीठी, खट्टी और ठंडी चीजें खाने से बचें क्योंकि ये इम्यूनिटी कम करती हैं, जबकि खाने में हरी सब्जियां और गुड़ शामिल करें। भाप लेने से भी प्रदूषण के असर को कम करने में मदद मिल सकती है।