कर्तव्य पथ पर आज 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर हिमालय की चोटियों के रक्षक यानी 'पहाड़ी शेरों' ने एक नया इतिहास रच दिया। परेड में पहली बार छह अलग-अलग स्काउट्स बटालियनों के 144 जवानों वाले एक 'मिश्रित स्काउट्स दल' ने हिस्सा लिया। इस संयुक्त दस्ते में अरुणाचल, लद्दाख, डोगरा, कुमाऊं, गढ़वाल और सिक्किम स्काउट्स के जांबाज सैनिकों ने एक साथ कदम से कदम मिलाकर मार्च किया।
इन स्काउट्स को 'सन ऑफ द सॉइल' यानी 'मिट्टी का लाल' कहा जाता है, क्योंकि ये जवान उन्हीं दुर्गम पहाड़ी इलाकों के निवासी हैं जहां ये तैनात रहते हैं। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन ने न केवल भारत की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दिखाया, बल्कि हिमालयी राज्यों की विविधता और उनकी संयुक्त सैन्य शक्ति का भी बेमिसाल उदाहरण पेश किया।