Breaking News

गोवा से दिल्ली आ रही IndiGo की फ्लाइट का इंजन फेल     |   SCO समिट में 30 से ज्यादा अहम दस्तावेजों पर मुहर, AI से ऊर्जा सुरक्षा तक कई समझौते     |   राम मंदिर के पहले CEO के चयन की प्रक्रिया तेज, 3 सदस्यीय कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट     |   संभल शाही जामा मस्जिद सर्वे विवाद पर SC में सुनवाई टली, अब 8 सितंबर को होगी सुनवाई     |   BRICS 2026 कारकेड रिहर्सल को लेकर दिल्ली में ट्रैफिक एडवाइजरी जारी     |  

गुजरात के इस जिले में अब 24 घंटे मिलेगा राशन, लागू होगी ये योजना

गुजरात के भावनगर में रहने वालीं सविता बेन घर में अकेली रहती हैं। ज्यादा उम्र और बीमारियों की वजह से उन्हें चलने-फिरने में भी दिक्कत होती है। इस वजह से जब वे राशन लेने के लिए जाती थीं तो लंबी लाइन की वजह से काफी थक जाती थीं। कई बार तो सविता बेन राशन लिए बिना ही लौट आती थीं और मजबूरी में बाहर से ज्यादा कीमत देकर सामान खरीदतीं थीं। लेकिन ये सब गुजरे दौर की बात है अब सविता बेन को अन्नपूर्ति अनाज एटीएम की बदौलत अपने कोटे का अनाज हर महीने मुफ्त में बिना इंतजार के आसानी से मिल जाता है।

उर्मिला बेन भी अकेली रहती हैं। तकरीबन एक दशक पहले अपने पति को खो देने के बाद से वे अपना पेट पालने के लिए छोटे-मोटे काम करती हैं। पहले उन्हें राशन की लाइनों में घंटों खड़े रहना पड़ता था, जिससे उनका समय तो बर्बाद होता ही था कभी कभी ज्यादा कीमत भी अदा करनी पड़ जाती थी। अब, सिर्फ़ अपने फिंगरप्रिंट को एटीएम कार्ड के रूप में इस्तेमाल कर उन्हें हर महीने 5 किलो चावल और 5 किलो गेहूं मुफ्त मिल जाता है। सबसे बड़ी बात ये है कि ये अनाज उर्मिला बेन अब किसी भी वक्त ले सकती हैं।

भावनगर की सांसद और केंद्रीय मंत्री निमूबेन बांभनिया ने पिछले साल 17 सितंबर को इस योजना को लॉन्च किया था। भावनगर का अनाज एटीएम - भारत का पहला दिन-रात चलने वाला अनाज डिस्पेंसर जो एक नियमित बैंक एटीएम की तरह काम करता है। भावनगर में अब तक 8,800 से ज्यादा लोग इस एटीएम से अनाज लेते हैं। इस योजना के लागू होने के बाद से लाइन में लगने वाला समय तो बच ही रहा है, सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और ज्यादा बढ़ गई है। इस योजना के लाभार्थियों में रोज कमाने-खाने वाले और वरिष्ठ नागरिकों समेत हजारों लोग शामिल हैं।

भावनगर में इसकी कामयाबी के बाद, गुजरात सरकार का लक्ष्य राज्य के दूसरे हिस्सों में भी अनाज एटीएम का विस्तार करना है। खाद्य सुरक्षा के लक्ष्य के साथ तकनीक को जोड़कर, ये पहल सुविधा, पारदर्शिता और सुशासन पक्का करती है।