उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक आकलन करने के लिए एक विशेष मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और राज्य सुरक्षा विभाग ने संयुक्त रूप से किया। मॉक ड्रिल का उद्देश्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा व्यवस्था को परखना और आपातकालीन परिस्थितियों में विभिन्न एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण करना था।
ड्रिल के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काफिले को शहर के अलग-अलग संवेदनशील और व्यस्त इलाकों से होकर गुजारा गया। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित खतरे की स्थितियों जैसे मार्ग अवरोध, संदिग्ध गतिविधि, अचानक हमले या आपातकालीन चिकित्सा स्थिति से निपटने की रणनीति का अभ्यास किया। काफिले की मूवमेंट के साथ-साथ ट्रैफिक प्रबंधन, रूट डायवर्जन और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के इंतजाम भी परखे गए।
इस रिहर्सल में स्थानीय पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, एटीएस, खुफिया विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी सक्रिय भागीदारी की। ड्रिल के माध्यम से विभिन्न सुरक्षा इकाइयों के बीच समन्वय, संचार प्रणाली और प्रतिक्रिया समय का मूल्यांकन किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के अभ्यास समय-समय पर किए जाते हैं ताकि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कमी को दूर किया जा सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जेड+ श्रेणी की उच्च स्तरीय वीआईपी सुरक्षा प्राप्त है। संभावित सुरक्षा खतरों को देखते हुए उनकी सुरक्षा में एनएसजी कमांडो सहित बहु-स्तरीय सुरक्षा घेरा तैनात रहता है। इसमें अत्याधुनिक हथियारों से लैस कमांडो, बुलेटप्रूफ वाहन, एंटी-सबोटाज जांच और 24 घंटे निगरानी जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इस तरह की मॉक ड्रिल बेहद जरूरी है। इससे न केवल सुरक्षा बलों की तैयारी का परीक्षण होता है, बल्कि किसी भी वास्तविक आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है।