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किशाऊ परियोजना: अमित शाह की मौजूदगी में UP, उत्तराखंड, हिमाचल, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने MoA पर किए हस्ताक्षर

ऊपरी यमुना बेसिन में जल संसाधनों के विकास और राज्यों के बीच सहयोग की दिशा में मंगलवार को बड़ा कदम उठाया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए।

बैठक में केंद्र और छह राज्यों के बीच करीब 28 MoA पर हस्ताक्षर हुए। रेणुका जी और लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजनाओं के लिए पहले ही समझौते हो चुके हैं और दोनों परियोजनाओं पर काम चल रहा है। किशाऊ परियोजना इन छह राज्यों के बीच निर्माण समझौता होने वाली तीसरी परियोजना है।बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव भी मौजूद रहे। बैठक करीब एक घंटे चली।

232.6 मीटर ऊंचा बनेगा बांध

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से होकर बहने वाली टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस, यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदी है। परियोजना के तहत 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया जाना है। इसमें करीब 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी का लाइव स्टोरेज होगा। इससे करीब 0.97 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने का अनुमान है। परियोजना से हर साल करीब 1,476 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होने की भी योजना है।

दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा फायदा

किशाऊ जलाशय में जमा पानी का इस्तेमाल सिंचाई और बिजली उत्पादन के अलावा पीने और औद्योगिक जरूरतों के लिए भी किया जाएगा। इससे खास तौर पर राजस्थान और दिल्ली में जल सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद है। परियोजना से यमुना में पानी के प्रवाह को बढ़ाने और नदी के पुनर्जीवन में भी मदद मिलेगी। परियोजना को किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड लागू करेगा। यह हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों की संयुक्त कंपनी है।

90 फीसदी खर्च केंद्र उठाएगा

बैठक में तय किया गया कि किशाऊ परियोजना के जल घटक की लागत का 90 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के तौर पर देगी, जबकि बाकी 10 फीसदी खर्च छह राज्यों के बीच साझा किया जाएगा। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने पर भी सहमति बनी है। इसके बदले हिमाचल प्रदेश के बिजली घटक की लागत में हिस्सेदारी की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे यमुना में साफ पानी का प्रवाह बढ़ाने और नदी के पुनर्जीवन में मदद मिलेगी।

1994 के समझौते के तहत आगे बढ़ी परियोजना

ऊपरी यमुना बेसिन के राज्यों ने 12 मई 1994 को ओखला बैराज तक यमुना के उपयोग योग्य सतही जल के बंटवारे को लेकर MoU पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें ऊपरी यमुना बेसिन में जल भंडारण परियोजनाएं बनाने की जरूरत बताई गई थी, ताकि यमुना के पानी का अधिकतम उपयोग किया जा सके।किशाऊ परियोजना को लेकर 16 जून को केंद्रीय गृह मंत्रालय में अमित शाह की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें संबंधित राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित परियोजना को लेकर सहमति बनी थी। इसके बाद राज्यों ने MoU पर हस्ताक्षर करने पर सहमति जताई थी। अब MoA पर हस्ताक्षर होने के बाद किशाऊ परियोजना को मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा।