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पश्चिम एशिया संकट पर भारत सतर्क, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को पश्चिम एशिया की स्थिति की निगरानी के लिए गठित अनौपचारिक अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह (आईजीओएम) की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में क्षेत्र की तेजी से बदलती परिस्थितियों की समीक्षा की गई और उससे जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। इससे पहले रविवार को हैदराबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक तनाव के बीच आर्थिक मजबूती के लिए देशवासियों से सामूहिक जनआंदोलन का हिस्सा बनने का आह्वान किया।

अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के कारण बढ़ती कीमतों के बीच प्रधानमंत्री ने कहा कि यह चुनौती केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के चरित्र की परीक्षा है।प्रधानमंत्री ने कहा, “देशभक्ति केवल सीमा पर प्राण न्योछावर करने तक सीमित नहीं है। आज के समय में यह अपने दैनिक जीवन में जिम्मेदारी निभाने और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का पालन करने का नाम है।” प्रधानमंत्री ने इसे “आर्थिक आत्मरक्षा” का मंत्र बताते हुए नागरिकों से अपनी उपभोग आदतों में बदलाव लाने का आग्रह किया।

ईंधन की बचत के लिए सुझाव

ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने लोगों से कहा कि जहां संभव हो वहां मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें, निजी वाहन का उपयोग करते समय कार-पूलिंग अपनाएं, माल परिवहन के लिए रेल सेवाओं को प्राथमिकता दें और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाएं।कोविड-19 के दौरान मिली दक्षता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने ऊर्जा की बचत और कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए वर्चुअल बैठकों और डिजिटल कार्यप्रणाली को फिर से बढ़ावा देने की बात कही।

विदेशी मुद्रा बचाने की अपील

प्रधानमंत्री ने नागरिकों से “रुपये के संरक्षक” बनने का आह्वान किया। उन्होंने अनावश्यक विदेशी यात्राओं, विदेश में छुट्टियां मनाने और विदेशी शादियों से बचने की सलाह दी। साथ ही घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने और भारत में ही समारोह आयोजित करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचकर विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने लोगों से जूते, बैग और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं सहित भारत में निर्मित उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि खाद्य तेल की खपत कम करने से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।

किसानों के लिए प्राकृतिक खेती पर जोर

किसानों से प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती अपनाने और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में 50 प्रतिशत तक कमी लाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसान पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रिम पंक्ति के योद्धा हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि वैश्विक परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण हों, भारत की सबसे बड़ी ताकत 140 करोड़ नागरिकों के छोटे-छोटे प्रयास हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की प्रगति केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि नागरिकों के रोजमर्रा के निर्णयों से तय होगी।