रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बीते बुधवार को सैनिकों से नई तकनीकों को अपनाने, प्रशिक्षण को प्राथमिकता देने और हर चुनौती के लिए तैयार रहने की अपील की। सिंह गुजरात के भुज में एक पारंपरिक 'बड़ाखाना' में सैनिकों के समूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, "युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि अनुशासन, मनोबल और निरंतर तत्परता से जीते जाते हैं। नई तकनीकों को अपनाएं, प्रशिक्षण को अपनी दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाएं और हर परिस्थिति के लिए खुद को तैयार रखें।" रक्षा मंत्री ने आगे कहा, "आज की दुनिया में अजेय शक्ति वही है, जो निरंतर सीखती है और नई चुनौतियों के मुताबिक ढलती है।"
रक्षा मंत्री भुज में सैनिकों के साथ दशहरा और विजयादशमी मनाएंगे। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जहां पारंपरिक खतरे बने हुए हैं, वहीं आतंकवाद, साइबर हमले, ड्रोन युद्ध और सूचना युद्ध जैसी नई चुनौतियों ने बहुआयामी जोखिम बढ़ा दिए हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "इनका मुकाबला केवल हथियारों से नहीं किया जा सकता। मानसिक शक्ति, अद्यतन ज्ञान और त्वरित अनुकूलनशीलता भी उतनी ही जरूरी हैं।" विजयादशमी पर शुभकामनाएं देते हुए सिंह ने कहा कि यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अन्याय पर धर्म की विजय का प्रतीक है।
रक्षा मंत्री ने सैनिकों को आश्वासन दिया कि सरकार उनके कल्याण, सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और पूर्व सैनिकों के सम्मान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोहराया, "हमारे सैनिकों की भलाई से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।" राजनाथ सिंह ने कहा, "एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का सपना हमारे सैनिकों के कंधों पर टिका है। उनके समर्पण और बलिदान से ही यह सपना हर दिन साकार हो रहा है।" 21वीं सदी को भारत का युग बताते हुए, सिंह ने कहा कि देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।
उन्होंने भरोसा जताया कि सशस्त्र बल अपनी की प्रतिबद्धता के साथ जल्द ही दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में से एक होगा। सिंह ने भुज और कच्छ की भूमि को श्रद्धांजलि अर्पित की और इसे केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि "भावना और साहस की गाथा" बताया। 1971 के युद्ध और 1999 के कारगिल संघर्ष के दौरान दिखाई गई वीरता और 2001 के भूकंप के बाद दिखाई गई दृढ़ता को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भुज राख से उठ खड़े होने वाले पौराणिक फीनिक्स पक्षी की भावना का उदाहरण है। उन्होंने आगे कहा, "कच्छ की धरती अपने लोगों और सैनिकों की बहादुरी और अदम्य साहस से भरी है।"
गुजरात: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भुज में सैनिकों के साथ मनाएंगे दशहरा
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