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किशाऊ परियोजना को लेकर CM योगी ने जताई खुशी, बोले- जल सुरक्षा और किसानों की समृद्धि को मिलेगी नई ताकत

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना के लिए हुए समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने इसे जल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम और सहकारी संघवाद की भावना का मजबूत उदाहरण बताया। मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में छह राज्यों—उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के बीच किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर MoU पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल भी मौजूद रहे। सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल संसाधनों के उचित उपयोग और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में लंबे समय से लंबित संकल्प आज साकार हुआ है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अमित शाह की अध्यक्षता और सीआर पाटिल की मौजूदगी में हुआ यह समझौता 'सहयोग से समाधान' और सहकारी संघवाद की भावना का मजबूत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से उत्तर प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, जिससे किसानों को लाभ मिलेगा। साथ ही पीने के पानी की उपलब्धता मजबूत होगी और यमुना नदी के निर्बाध एवं स्वच्छ प्रवाह को नई ताकत मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि राज्यों का यह साझा प्रयास जल सुरक्षा और कृषि समृद्धि के नए रास्ते खोलेगा। इससे विकास की गति तेज होगी और 'विकसित उत्तर प्रदेश-विकसित भारत' के संकल्प को भी नई गति मिलेगी। किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस, यमुना की प्रमुख सहायक नदी है और परियोजना उत्तराखंड के देहरादून तथा हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से जुड़ी है।

परियोजना के तहत 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया जाएगा। इसमें 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर लाइव स्टोरेज क्षमता होगी। इससे करीब 0.97 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलने का अनुमान है। परियोजना से सालाना करीब 1,476 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन की भी योजना है।

जलाशय में जमा पानी का इस्तेमाल सिंचाई और बिजली उत्पादन के साथ-साथ पीने और औद्योगिक जरूरतों के लिए किया जाएगा। इससे खास तौर पर राजस्थान और दिल्ली की जल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और यमुना के पुनर्जीवन में भी योगदान होगा। परियोजना को किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड के जरिए लागू किया जाएगा, जो हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों की संयुक्त कंपनी है।

ऊपरी यमुना बेसिन के राज्यों ने 12 मई 1994 को ओखला बैराज तक यमुना के उपयोग योग्य सतही जल के बंटवारे को लेकर MoU किया था। इस समझौते में यमुना के पानी का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए ऊपरी यमुना बेसिन में जल भंडारण परियोजनाएं विकसित करने की जरूरत बताई गई थी। 16 जून को केंद्रीय गृह मंत्रालय में अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में किशाऊ परियोजना को लेकर संबंधित राज्यों के बीच सहमति बनी थी। इसके करीब तीन महीने बाद अब परियोजना के लिए समझौता हुआ है।