बांग्लादेश में 12 फरवरी को ऐतिहासिक संसदीय चुनाव होने वाले हैं। 2024 में छात्रों की अगुवाई में हुए विद्रोह के बाद पहली बार चुनाव हो रहे हैं। इस छात्र विद्रोह को अक्सर 'मॉनसून क्रांति' कहा जाता है, जिसने शेख हसीना के 15 साल के शासन को खत्म कर दिया था। चुनाव प्रचार मंगलवार को थम गया। आवामी लीग पर प्रतिबंध के बाद अब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी सत्ता के लिए मजबूत दावेदारी ठोक रहे हैं। दोनों के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है।
ढाका में, जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ता देर रात तक वोटर स्लिप बांटते देखे गए, ताकि उसके समर्थक आसानी से अपने पोलिंग बूथ ढूंढ सकें। पार्टी का अभियान साफ-सुथरी सरकार, भ्रष्टाचार विरोधी उपायों और इस्लामी मूल्यों पर आधारित नेतृत्व के वादों पर केंद्रित रहा है।
वहीं बीएनपी यानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के साथ अपने अभियान को खत्म किया। उसने सालों के कथित राजनीतिक दबाव के बाद संस्थानों को फिर से बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। पार्टी ने रोजगार सृजन, अवसंरचना विकास और जवाबदेही बनाने का वादा किया है। साथ ही अल्पसंख्यक अधिकारों और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी के मुद्दों को भी उठाया है।
बांग्लादेश में हो रहे संसदीय चुनाव में 300 निर्वाचन क्षेत्रों में लगभग 12 करोड़ 80 लाख मतदाता अपना वोट डालने के लिए पात्र हैं। हालांकि एक सीट पर मतदान एक उम्मीदवार की मौत के बाद रद्द कर दिया गया है। मतदान खत्म होने के बाद मतगणना शुरू होगी और शनिवार यानी 13 फरवरी की दोपहर तक चुनाव के नतीजे आने की उम्मीद है।