बिहार में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ बुधवार को हाजीपुर समेत कई प्रभावित इलाकों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया और बिहार सरकार को केंद्र की ओर से हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि कई इलाकों में बाढ़ का पानी 2016 की भीषण बाढ़ के उच्चतम स्तर से करीब एक फीट अधिक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित होकर विस्थापित हुए हैं। लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण केले और मक्के की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। इसके अलावा घरों, सड़कों और पशुधन को भी नुकसान पहुंचा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर उन्हें बिहार भेजा गया है, ताकि वह जमीनी स्थिति का खुद आकलन कर सकें। कृषि मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय की विशेष टीमें प्रभावित जिलों में नुकसान का सर्वे कर रही हैं। जल्द ही एक अतिरिक्त अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम भी बिहार का दौरा करेगी।
शिवराज चौहान ने कहा कि बिहार सरकार राहत कार्यों में पूरी क्षमता के साथ जुटी है। प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता के रूप में 7,000 रुपये की राशि भेजी जा रही है। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में चिकित्सा टीमें नावों के जरिए लोगों तक पहुंच रही हैं और भोजन वितरण की व्यवस्था भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि सड़कों, मकानों और फसलों को हुए नुकसान के संबंध में राज्य सरकार की ओर से एनडीआरएफ सहायता के लिए भेजे गए प्रस्ताव के आधार पर केंद्र सरकार हरसंभव मदद करेगी।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दौरे के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि संयुक्त निरीक्षण कई गंभीर रूप से प्रभावित जिलों में जारी रहेगा। चौधरी के मुताबिक, टीम मंगेर और भागलपुर समेत कई जिलों का दौरा करेगी और इसके बाद व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने आर्थिक सहायता देना शुरू कर दिया है। इससे पहले मंगलवार को उन्होंने पटना स्थित लोक सेवक आवास के ‘संकल्प’ सभागार में राहत वितरण कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इस दौरान 8,27,472 बाढ़ प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से कुल 579.23 करोड़ रुपये भेजे गए। प्रत्येक परिवार को 7,000 रुपये की सहायता दी गई।