Mamta Kulkarni: 90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने कहा कि वो फिल्म उद्योग में बिल्कुल भी वापसी नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि हर चीज की एक उम्र होती है। ममता कुलकर्णी ने गौ माता पर आधारित आगामी फिल्म "गोदान" का समर्थन किया है। विनोद कुमार चौधरी और अमित प्रजापति द्वारा निर्देशित ये सामाजिक फिल्म संस्कृति, गौ संरक्षण, नैतिक मूल्यों, स्वास्थ्य और समृद्धि जैसे भारतीय मूल्यों को समाज तक पहुंचा रही है।
ममता कुलकर्णी ने कहा, "मैं उस क्षेत्र में भी नहीं जाना चाहती। मैंने वो सब कर लिया है। मेरा आंतरिक त्याग 25 साल पहले हो गया था। मैं कल्पना भी नहीं कर सकती कि मैं 25 साल पहले जो करती थी, वो फिर से कर पाऊं। उम्र भी मायने रखती है। मैं अब 50 साल की हो गई हूं। अगर मैं वही करने की कोशिश करूं जो मैं पहले करती थी, 'चोली छोटी हो गई और चुन्नी बड़ी हो गई', तो ये मुझे शोभा नहीं देगा। जब आप युवा होते हैं, तो सब कुछ आप पर जंचता है- गीत, वेशभूषा, रोमांस। हर चीज की एक उम्र होती है।"
53 साल की ममता कुलकर्णी 90 के दशक में कई हिट फिल्म जैसे "करण अर्जुन", "क्रांतिवीर", "सबसे बड़ा खिलाड़ी" और "चाइना गेट" में काम कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि आज मैं फिल्में दर्शक के तौर पर देखती हूं, लेकिन उनकी शिकायत है कि फिल्मों पर पश्चिम का प्रभाव बहुत ज्यादा है।
उन्होंने कहा, "मैं फिल्में देखती हूं। पहले मैं फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा थी; अब मैं इसे एक दर्शक के रूप में देखती हूं। मैं देखती हूं कि चीजें कितनी बदल गई हैं और बदलाव जरूरी है। लेकिन हम बहुत ज्यादा पश्चिमीकरण का शिकार हो गए हैं। एक मध्य मार्ग होना चाहिए। किसी भी चीज की अति हानिकारक होती है।"
ममता कुलकर्णी पर्दे पर आखिरी बार साल 2002 में आई फिल्म "कभी तुम कभी हम" में नजर आईं थी और उनके अंडरवर्ल्ड से जुड़े होने की अफवाहें थीं। ममता कुलकर्णी पिछले साल आध्यात्मिक यात्रा पर निकलने के बाद सुर्खियों में आईं। उन्होंने आज के सिनेमा की सराहना की और विक्की कौशल की "छवा" और "धुरंधर" को खूब पंसद किया।
उन्होंने आगे कहा, "सिनेमा में सुधार हुआ है। पहले ज्यादातर फिल्में गाने, रोमांस और जुदाई पर आधारित होती थीं। अब फिल्में आम लोगों से जुड़े विषयों पर आधारित होती हैं। मैंने हाल ही में विक्की कौशल की 'छवा' देखी। मुझे यह पसंद आई। मैंने 'धुरंधर' भी देखी। वह भी मुझे पसंद आई। मैं अब रोमांटिक फिल्में नहीं देखती। इसलिए नहीं कि 50 साल की उम्र में रोमांस खत्म हो गया, बल्कि इसलिए कि मेरी मानसिकता बदल गई है। अब मैं फिल्में जीवन, किरदारों और उन नजरियों को समझने के लिए देखती हूं जिन्हें हम कितना भी पढ़ लें, शायद समझ न पाएं।"
ममता कुलकर्णी ने भारतीय संस्कृति में गहराई से समाई गाय के प्रति जागरूकता फैलाने के प्रयास में बनी फिल्म "गोदान" की सराहना की। उन्होंने कहा, "कामधेनु इंटरनेशनल ने 'गोदान' नामक एक प्रेरणादायक फिल्म बनाई है, जो भारतीय संस्कृति को वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोणों से प्रस्तुत करती है। हर हिंदू स्वभाव से ही गायों का रक्षक होता है और उनकी पूजा करता है... हम गाय को माता का दर्जा देते हैं। हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि गाय के भीतर 33 कोटि देवियां निवास करती हैं। मेरा मानना है कि कामधेनु प्रोडक्शंस ने इस फिल्म को बनाने और प्रस्तुत करने में बहुत साहस दिखाया है। मैं कहना चाहूंगी कि इसे कर-मुक्त किया जाना चाहिए; बच्चों को इसे मुफ्त में देखने की अनुमति दी जानी चाहिए और सभी धर्मों में इसका प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए। इससे जागरूकता फैलेगी और हम गौ माता की रक्षा कर सकेंगे।"
फिल्म में मनोज जोशी, उपासना सिंह, राजेश जैस, साहिल आनंद, रोज सरदाना, सहर्ष शुक्ला, उत्कर्ष भारद्वाज अहम किरदार में हैं। कामधेनु गौशाला समिति, दीनदयाल धाम, फराह, मथुरा, उत्तर प्रदेश के सहयोग से कामधेनु इंटरनेशनल प्रोडक्शन एलएलपी के बैनर तले विनोद कुमार चौधरी द्वारा निर्मित ये फिल्म छह फरवरी, 2026 को थिएटर में रिलीज होगी।