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किसी से भी परामर्श नहीं करने का रवैया सरकार के हर निर्णय में झलकता है: कपिल सिब्बल

New Delhi: यूजीसी समता विनियम को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने शनिवार को मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि कभी किसी से भी परामर्श न करने का उसका रवैया उसके सभी निर्णयों में परिलक्षित होता है। हालांकि, यूपीए 2 सरकार में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रहे सिब्बल ने यह भी कहा कि इस मामले पर अपनी राय देना उनके लिए उचित नहीं होगा, क्योंकि यह मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है।

उन्होंने साक्षात्कार के दौरान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विवादास्पद समता विनियम के बारे में पूछे जाने पर ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘यह मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है। मुझे लगता है कि इस पर कोई राय देना मेरे लिए अनुचित होगा, सिवाय इसके कि व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए, तो इस देश में हमें समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत एक महान राष्ट्र बनेगा, हम विकसित भारत की बात करते हैं, यह सब तभी होगा, जब नीतिगत दृष्टिकोण से और कार्यान्वयन के दृष्टिकोण से भी समाज के सभी वर्गों का ध्यान रखा जाएगा।’’

राज्यसभा के निर्दलीय सदस्य ने कहा, ‘‘इसलिए समाज में विभाजन पैदा करने का कोई भी प्रयास अंततः राष्ट्र के भविष्य के लिए हानिकारक है। इसका यूजीसी विनियमन से कोई लेना-देना नहीं है, यह एक सामान्य धारणा है, जिसे ध्यान में रखना आवश्यक है, क्योंकि हम सभी सबसे पहले भारत के नागरिक हैं, फिर हम किसी समुदाय, किसी जाति, किसी क्षेत्र से जुड़े हैं, और फिर हमारी कोई एक निश्चित भाषा है।’’

उन्होंने कहा कि यह इतना विविधताओं से भरा देश है कि इस विविधता को लाभ के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि इससे समाज के हर वर्ग की चिंताओं पर विचार करना संभव हो पाता है। सिब्बल ने कहा, ‘‘इसलिए, यदि आप समाज में समस्याएं पैदा करना शुरू कर देते हैं, तो भारत का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।’’ उच्चतम ने पिछले बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय परिसर में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए लाये गये यूजीसी के हालिया समता विनियम पर रोक लगा दी।

उसने कहा कि ढांचा ‘प्रथम दृष्टया अस्पष्ट’ है, इसके ‘बहुत व्यापक परिणाम’ हो सकते हैं और अंततः यह समाज को ‘खतरनाक प्रभाव’ के साथ विभाजित कर सकता है। यह पूछे जाने पर कि क्या इस मुद्दे को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था, सिब्बल ने कहा,‘‘मुझे नहीं पता कि बेहतर होता या बदतर, मुझे इसका कोई अंदाजा नहीं है। 2014 से, जब से वे (मोदी सरकार) सत्ता में आए हैं, उनकी सामान्य प्रवृत्ति यही रही है कि वे किसी से भी अपने विचार साझा नहीं करते। इसलिए, किसी से परामर्श न करने की उनकी यह निरंतरता उनके द्वारा लिए गए हर फैसले में दिखाई देती है।”