Odisha: ओडिशा में पुरी के 'रथ खला' में, सदियों पुरानी परंपरा लकड़ी और कारीगरी के रूप में जीवंत हो उठती है। छेनी और हथौड़ों की लगातार तालबद्ध गूंज के बीच, कुशल कारीगर समय से होड़ लगाते हुए तीन भव्य रथों- नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन का निर्माण कर रहे हैं। ये रथ ही सालाना जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके भाई भगवान बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा को लेकर आगे बढ़ेंगे।
जैसे-जैसे यह उत्सव नजदीक आ रहा है, अक्षय तृतीया के दिन शुरू हुआ रथ निर्माण का कार्य अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। अब जब रथों के पहिए बनकर तैयार हो चुके हैं, तो कारीगरों ने रथों के मुख्य आधार को जोड़ने का काम शुरू कर दिया है।
निर्माण प्रक्रिया के साथ-साथ पारंपरिक अनुष्ठान भी जारी हैं। कारीगर रथों के आधार, पहियों और धुरियों को मजबूती से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, ताकि इस भव्य शोभायात्रा के लिए इन विशाल लकड़ी की संरचनाओं को तैयार किया जा सके।
लकड़ी के ढांचे को आकार देने वाले बढ़ई से लेकर बड़े-बड़े लट्ठे हटाने वाले सेवकों और लोहे के जोड़ बनाने वाले लोहारों तक, हर समूह पवित्र रथों को आकार देने में अहम भूमिका निभाता है। 16 जुलाई को होने वाली विश्व-प्रसिद्ध रथ यात्रा के मद्देनजर, ये भव्य रथ हर गुजरते दिन के साथ धीरे-धीरे आकार ले रहे हैं। इस भव्य आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनने के लिए भारत और दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचेंगे।