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कांगो और युगांडा में इबोला वायरस का कहर, WHO ने घोषित की हेल्थ इमरजेंसी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कांगो और युगांडा में इबोला के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय मानते हुए रविवार को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित कर दी है। यह निर्णय इबोला के कारण 88 लोगों की मौत होने और 300 से अधिक संदिग्ध मामले दर्ज होने के बाद लिया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि बंडीबुग्यो वायरस से फैले ये प्रकोप कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी की श्रेणी में नहीं आते हैं। संगठन ने देशों को अंतरराष्ट्रीय सीमाएं बंद नहीं करने की सलाह भी दी है। 

कांगो के स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, पहला मामला एक नर्स का माना जा रहा है, जिसकी 24 अप्रैल को मौत हुई थी। जांच में अब तक इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के 8 मामलों की पुष्टि हुई है। ये बीमारी फिलहाल इतुरी प्रांत के बुनीया, रवामपारा और मोंगवालू इलाकों तक पहुंच चुकी है। कांगो में 1976 में पहली बार इबोला सामने आया था। यह देश में इसका 17वां मामला है।

इबोला एक गंभीर और अक्सर घातक बीमारी है। यह वायरस संक्रमित जानवरों से मनुष्यों में फैलता है। इसके लक्षणों में बुखार, उल्टी और आंतरिक रक्तस्राव शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ ने संक्रमण को रोकने के लिए सख्त उपायों की सिफारिश की है। इसमें स्वच्छता और संक्रमित व्यक्तियों से दूरी बनाए रखना शामिल है। कांगो में जिस इलाके में यह वायरस मिला, उसके पास बहने वाली इबोला नदी के नाम पर इसका नाम रखा गया।